टैरिफ की टेंशन और डॉलर की कमजोरी का असर
23 फरवरी 2026 को, चांदी की कीमतों में लगभग 5.33% का शानदार इजाफा हुआ और यह करीब ₹2,66,290 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई। इस तेजी का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा वैश्विक टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने का निर्णय रहा। इस संरक्षणवादी (protectionist) कदम ने बाजार में आर्थिक अनिश्चितता को बढ़ावा दिया, जिससे चांदी को एक सुरक्षित निवेश (safe-haven asset) के तौर पर देखा जाने लगा।
इसके साथ ही, अमेरिकी डॉलर में आई नरमी ने भी कीमती धातुओं को सहारा दिया। एक कमजोर डॉलर चांदी को अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए सस्ता बनाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ती है। इसी दौरान, डॉलर इंडेक्स (DXY) घटकर करीब 97.50 के स्तर पर आ गया, जो आमतौर पर कमोडिटी की कीमतों के साथ विपरीत संबंध रखता है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव जैसे भू-राजनीतिक मुद्दे भी उन संपत्तियों की मांग को बढ़ा रहे हैं जिन्हें निवेशक स्थिर मूल्य का भंडार मानते हैं।
एनालिस्ट्स की नजर में चांदी का भविष्य
चांदी की यह मौजूदा बढ़त ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक आर्थिक नीतियों और मौद्रिक रणनीतियों में बदलाव की उम्मीदें हैं। टैरिफ से जुड़ी चिंताएं और भू-राजनीतिक जोखिम भले ही तात्कालिक चालक हों, लेकिन लंबी अवधि में चांदी की कीमत का निर्धारण व्यापक आर्थिक परिस्थितियां और फेडरल रिजर्व के फैसले करेंगे।
इसी दिन सोना भी लगभग ₹1,58,410 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था। हालांकि, चांदी का प्रदर्शन सोने की तुलना में अधिक अस्थिर (volatile) रहता है, क्योंकि यह न केवल मूल्य के भंडार (store of value) के रूप में काम करती है, बल्कि एक औद्योगिक कमोडिटी (industrial commodity) के रूप में भी इसकी अहमियत है। 23 फरवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी करीब $87.18 प्रति ट्रॉय औंस पर थी, जो एक महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शाती है।
2026 के लिए फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। विश्लेषकों को ब्याज दरों में कटौती की संभावना दिख रही है, जो आमतौर पर चांदी जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों के लिए अनुकूल होती है। जनवरी की एफओएमसी (FOMC) बैठक के मिनट्स से पता चला कि नीति निर्माताओं के बीच ब्याज दर के रास्ते को लेकर मतभेद थे, जो भविष्य में सावधानी बरतने का संकेत देता है। कुछ अनुमानों के अनुसार, 2026 में एक या दो बार दरें घटाई जा सकती हैं, जिससे फेडरल फंड रेट अपनी वर्तमान 3.5%-3.75% की सीमा से नीचे आ सकता है।
निवेशकों के लिए, Nippon India Silver ETF, ICICI Prudential Silver ETF, और HDFC Silver ETF जैसे सिल्वर ईटीएफ (Silver ETFs) चांदी में निवेश का एक सुलभ तरीका प्रदान करते हैं।
जोखिम और संभावित गिरावट?
इन सकारात्मक संकेतों के बावजूद, चांदी की अंतर्निहित अस्थिरता (volatility) महत्वपूर्ण जोखिम भी पैदा करती है। यह वर्तमान उछाल, जो बड़े पैमाने पर टैरिफ और भू-राजनीतिक चिंताओं पर सट्टेबाजी (speculative) वाले प्रवाह के कारण है, स्थायी नहीं रह सकती। यदि राजनयिक समाधान निकलते हैं या व्यापारिक तनाव कम होता है, तो बाजार में इन पोजीशनों की तेजी से बिकवाली देखी जा सकती है।
चांदी के मूल्य में बड़े उतार-चढ़ाव, जैसे कि 1 फरवरी को ₹3.50 लाख/किलो से घटकर 18 फरवरी तक ₹2.55 लाख/किलो हो जाना और फिर संभलना, इसके सट्टेबाजी वाले स्वभाव को उजागर करते हैं। सोने की तुलना में चांदी का बाजार छोटा होने के कारण यह अस्थिरता और भी बढ़ जाती है, जिससे यह तेज सुधारों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती है। इलेक्ट्रॉनिक्स, AI और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों से औद्योगिक मांग पर इसकी निर्भरता भी एक जोखिम है। यदि वैश्विक आर्थिक गतिविधि धीमी होती है, तो औद्योगिक मांग कम हो सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव आ सकता है, भले ही भू-राजनीतिक भय बना रहे।
विश्लेषकों के बीच भी चांदी के भविष्य को लेकर मिश्रित राय है। J.P. Morgan के अनुमान बताते हैं कि आपूर्ति की कमी और मजबूत मांग के कारण 2026 में औसत कीमत $81 प्रति औंस रह सकती है, जो चौथी तिमाही तक $85/औंस तक जा सकती है। अन्य अनुमानों में रॉयटर्स पोल से $79.50/औंस का मध्य अनुमान और बैंक ऑफ अमेरिका से $56.25 का औसत और $65/औंस का शिखर शामिल है। हालांकि, GoldSilver जैसे कुछ अधिक आशावादी विश्लेषक आपूर्ति की कमी और बढ़ती औद्योगिक मांग के कारण 2028 तक $100/औंस से ऊपर, और कुछ तो $175+ या $200-$375 तक की भविष्यवाणी कर रहे हैं।
ये आशावादी अनुमान भी चांदी की अंतर्निहित अस्थिरता और तेज गिरावट की संभावनाओं को स्वीकार करते हैं। बाजार अमेरिकी व्यापार नीति, भू-राजनीतिक स्थिरता और फेडरल रिजर्व के मौद्रिक रुख में होने वाले घटनाक्रमों पर कड़ी नजर रखेगा, जो चांदी की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।