चांदी की चमक बढ़ी, सोने को छोड़ा पीछे! ETF डिमांड से आई तूफानी तेजी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
चांदी की चमक बढ़ी, सोने को छोड़ा पीछे! ETF डिमांड से आई तूफानी तेजी
Overview

कीमती धातुओं (precious metals) के बाजार में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है, जिसमें चांदी (silver) सोने (gold) से कहीं आगे निकल गई है। MCX सिल्वर फ्यूचर्स में **5%** से ज्यादा की उछाल आई, जबकि COMEX सिल्वर ने भी ऐसे ही Gains दिखाए, जो सोने की बढ़त से काफी ज्यादा हैं। यह Momentum ETFs में भी दिखा, जहां सिल्वर फंड्स ने बेहतर प्रदर्शन किया।

चांदी ने सोने को कैसे पछाड़ा?

25 मार्च 2026 को कीमती धातुओं के बाजार में एक बड़ी हलचल देखी गई। चांदी ने सोने की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन किया। घरेलू एक्सचेंज पर, MCX सिल्वर फ्यूचर्स ₹2,36,137 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया, जो 5.4% की बड़ी छलांग थी। वहीं, MCX गोल्ड फ्यूचर्स लगभग ₹1,44,434 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था, जो करीब 4% ऊपर था। यही पैटर्न इंटरनेशनल मार्केट में भी दिखा, जहां COMEX सिल्वर फ्यूचर्स $73.345 पर पहुंच गया ( 5.43% की बढ़त के साथ), जो COMEX गोल्ड फ्यूचर्स $4,586.10 ( 4.2% ऊपर) से काफी आगे था। यह साफ दिखाता है कि इस ट्रेडिंग सेशन में चांदी की Momentum काफी मजबूत रही।

ETFs में दिखा निवेशकों का झुकाव

एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) ने भी इस ट्रेंड को फॉलो किया, लेकिन सिल्वर ETFs ने खास तौर पर बड़े Gains दिखाए। Nippon India Silver ETF, HDFC Silver ETF और ICICI Prudential Silver ETF जैसे कई सिल्वर ETFs में 11% तक की तेजी देखी गई। दूसरी ओर, गोल्ड ETFs में 3% से 5% के बीच मामूली बढ़त दर्ज की गई, जिसमें ICICI Prudential Gold ETF लगभग 5% के साथ सबसे बेहतर रहा। ETFs के प्रदर्शन में यह अंतर बताता है कि निवेशक अब चांदी की ओर अपना पैसा ज्यादा लगा रहे हैं।

चांदी की तेजी के पीछे क्या है? मैक्रो फैक्टर और इतिहास

इस शानदार तेजी के पीछे कई आर्थिक कारण हैं। कमजोर हुए अमेरिकी डॉलर (U.S. Dollar) ने सोने और चांदी जैसी डॉलर-प्राइस्ड कमोडिटीज़ (dollar-priced commodities) को सहारा दिया है। गिरते तेल की कीमतों (oil prices) ने महंगाई (inflation) की चिंताओं को कम किया है, जिससे कीमती धातुओं को मदद मिली है। हालांकि, जारी महंगाई की आशंकाएं सोने को एक सेफ-हेवन (safe haven) के तौर पर सपोर्ट कर रही हैं। भू-राजनीतिक घटनाएं (Geopolitical events), जैसे कि अमेरिका-ईरान बातचीत की खबरें, ने सतर्कता भरा आशावाद (cautious optimism) पैदा किया है, जिससे सेफ-हेवन की मांग थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन कीमतों में रिकवरी को भी सपोर्ट मिल रहा है। ऐतिहासिक रूप से, कीमती धातुओं के बुल मार्केट (bull markets) के आखिरी चरणों में चांदी अक्सर सोने से बेहतर प्रदर्शन करती है, कभी-कभी तो दोगुनी-तिगुनी भी बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि चांदी का मार्केट छोटा है, यह ज्यादा वोलेटाइल (volatile) है, और यह एक मोनेटरी एसेट (monetary asset) और इंडस्ट्रियल मटेरियल (industrial material) दोनों का काम करती है। सोने-चांदी का अनुपात (gold-silver ratio) अब लगभग 62:1 है, जो पहले के उच्च स्तरों से कम है, और यह दर्शाता है कि चांदी मजबूत हो रही है। COMEX सिल्वर फ्यूचर्स का RSI 63.732 पर है, जो मजबूत अपवर्ड Momentum का संकेत दे रहा है।

चांदी के जोखिम: वोलेटिलिटी और इंडस्ट्रियल डिमांड

अपनी मजबूत परफॉर्मेंस के बावजूद, चांदी के लिए महत्वपूर्ण जोखिम (risks) बने हुए हैं। इसकी उच्च वोलेटिलिटी (high volatility), जो इसके छोटे बाजार और बड़ी इंडस्ट्रियल डिमांड (industrial demand) के कारण है, इसे अचानक गिरावट के लिए प्रोन बनाती है। सोने के विपरीत, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से वैल्यू स्टोर (store of value) के तौर पर होता है, चांदी की करीब 60% मांग इंडस्ट्रियल उपयोगों से आती है। यह इसकी कीमत को आर्थिक विकास (economic growth) और टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स (technology trends) से जोड़ता है। इस दोहरी भूमिका का मतलब है कि आर्थिक मंदी (economic slowdowns) या मार्केट सेंटिमेंट में बदलाव के दौरान निवेश और इंडस्ट्रियल दोनों मांग एक साथ कमजोर हो सकती हैं। चांदी की सप्लाई (supply) का एक बड़ा हिस्सा अन्य धातुओं के खनन (mining) के बाय-प्रोडक्ट (by-product) के रूप में आता है, जिससे मांग बढ़ने पर कीमत में उतार-चढ़ाव की स्थिति और बिगड़ सकती है। हाल के इतिहास में यह भेद्यता (vulnerability) देखी गई है; जनवरी 2026 के अंत में लीवरेज्ड फंड लिक्विडेशन (leveraged fund liquidations) और मार्जिन कॉल्स (margin calls) के कारण चांदी की कीमतों में एक दिन में भारी ~30% की गिरावट आई थी, जो वोलेटाइल बाजारों में बड़े नुकसान की क्षमता को दर्शाता है। इसके अलावा, सोलर पैनल (solar panels) और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) जैसे क्षेत्रों से इंडस्ट्रियल मांग लंबी अवधि में सकारात्मक है, लेकिन ऊंची चांदी की लागत अंततः इस मांग को कम कर सकती है, जिससे और अधिक मूल्य स्विंग्स (price swings) हो सकते हैं।

विश्लेषकों की राय और भविष्य का अनुमान

विश्लेषक (Analysts) मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं (geopolitical uncertainties) को देखते हुए महंगाई से बचाव (inflation hedges) और सेफ-हेवन एसेट्स (safe-haven assets) के तौर पर कीमती धातुओं को लेकर आम तौर पर सकारात्मक बने हुए हैं। कुछ पूर्वानुमानों (forecasts) के अनुसार, साल के अंत तक चांदी $100+ के आंकड़े को छू सकती है। जेपी मॉर्गन (J.P. Morgan) ने 2026 के लिए औसत $81/oz का अनुमान लगाया है। प्रमुख बैंकों द्वारा सोने की कीमत के लक्ष्य 2026 के अंत तक $5,600 से $6,200 प्रति औंस के बीच हैं। हालांकि, चांदी की अत्यधिक वोलेटिलिटी के कारण सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है; अगर बाजार की स्थिति बदलती है तो यह सोने से ज्यादा तेजी से गिर सकती है। जबकि वर्तमान रुझान (trends) कीमती धातुओं के पक्ष में हैं, निवेशकों को ब्याज दरों (interest rates), डॉलर की मजबूती (dollar's strength) और इंडस्ट्रियल मांग के रुझानों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये भविष्य की कीमतों को काफी प्रभावित करेंगे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कीमती धातुएं वोलेटाइल बनी रहेंगी। निवेश निर्णयों के लिए पश्चिम एशिया (West Asia) में घटनाओं और आर्थिक संकेतों (economic signals) की निगरानी महत्वपूर्ण है।

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