जनवरी के आखिर में आई चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, जिसने चंद दिनों में लगभग 40% का वैल्यू खत्म कर दिया था, के बाद आज की रिकवरी ने बाजार में नई हलचल मचा दी है। 04 फरवरी 2026 को 5.28% का उछाल देखने को मिला, जिससे भाव ₹28,153 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए। यह वापसी उन निवेशकों के लिए उम्मीद की किरण है जो भारी नुकसान झेल रहे थे।
रिकवरी की वजहें: क्यों लौटी चांदी में चमक?
इस रिकवरी के पीछे कई कारण हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि जनवरी की तेज बिकवाली के बाद, जब बड़ी लिक्विडेशन (liquidation) की प्रक्रिया थमी, तो निवेशकों ने कम दामों पर खरीदारी शुरू की। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में, XAG/USD (चांदी का स्पॉट प्राइस) $87.60 के स्तर तक पहुंचा। इसके अलावा, भू-राजनीतिक (geopolitical) तनावों में बढ़ोतरी, जैसे अमेरिका द्वारा ईरान के एक ड्रोन को मार गिराए जाने की खबरों ने, सेफ-हेवन (safe-haven) एसेट्स की मांग बढ़ाई है, जिसका सीधा फायदा चांदी जैसी कीमती धातुओं को मिला है। वहीं, 02 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील (trade deal) की सकारात्मक खबरों ने भी बुलियन (bullion) मार्केट में रिकवरी को बल दिया है।
फंडामेंटल्स का मजबूत सहारा
रिकवरी को केवल तकनीकी कारणों से नहीं, बल्कि मजबूत फंडामेंटल्स (fundamentals) से भी सहारा मिला है। केडिया एडवाइजरी के फाउंडर अजय केडिया के अनुसार, चांदी की सप्लाई में लगातार कमी और इंडस्ट्रीज से आने वाली डिमांड (industrial demand) का बने रहना कीमतों को लंबे समय तक सहारा दे सकता है। भले ही जनवरी की स्पेकुलेटिव (speculative) रैली खत्म हो गई हो, लेकिन ये बुनियादी कारण अभी भी मजबूत बने हुए हैं।
मैक्रो इकोनॉमिक संकेत और सोने का साथ
मैक्रो इकोनॉमिक (macroeconomic) मोर्चे पर भी कुछ अहम संकेत मिले हैं। 04 फरवरी 2026 को US डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) 97.4143 के आसपास कारोबार कर रहा था, हालांकि यह पिछले 12 महीनों में 9.45% नीचे रहा है। उम्मीद है कि 2026 के मध्य तक डॉलर में और कमजोरी आ सकती है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा 2026 में रेट कट (rate cut) की उम्मीदें भी बाजार में हैं, जो चांदी जैसी नॉन-यील्डिंग (non-yielding) एसेट्स को निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाती हैं। सोने की कीमतों में भी नरमी के बाद अच्छी वापसी देखी गई है, जो 04 फरवरी 2026 को $5,043.78 प्रति औंस पर पहुंच गया। 03 फरवरी को गोल्ड-सिल्वर रेश्यो (Gold-Silver Ratio) 58.02 पर था, जो दर्शाता है कि चांदी में अभी और ऊपर जाने की गुंजाइश हो सकती है। इसके अलावा, AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग से कॉपर जैसे इंडस्ट्रियल मेटल (industrial metal) में भी सप्लाई की कमी देखी जा रही है, जो कमोडिटी (commodity) मार्केट में व्यापक मजबूती का संकेत है।
एक्सपर्ट्स की राय: अभी बरतें सावधानी
हालांकि, मौजूदा रिकवरी के बावजूद, बाजार के एनालिस्ट्स (analysts) अभी भी सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स (Geojit Investments) के कमोडिटी रिसर्च हेड हरीश वी का कहना है कि हालिया गिरावट के पीछे मार्जिन हाइक (margin hike) और मजबूत डॉलर जैसे शॉर्ट-टर्म फैक्टर्स (short-term factors) थे, न कि कोई बड़ा फंडामेंटल बदलाव। UBS के एनालिस्ट्स (analysts) भी मानते हैं कि चांदी में लॉन्ग-टर्म एक्सपोजर (long-term exposure) के लिए अभी जल्दबाजी होगी। वे 2026 के अंत तक चांदी की औसत कीमत $70 प्रति औंस रहने का अनुमान लगा रहे हैं, जिसमें $85 तक के स्पाइक्स (spikes) संभव हैं, लेकिन $100 के पार लगातार बढ़त को लेकर वे अनिश्चित हैं। हरीश वी ने पहले भी आगाह किया है कि चांदी के इतिहास में तेज उछाल के बाद बड़ी गिरावट का दौर भी आता रहा है। मौजूदा स्तर पर जोखिम-इनाम (risk-reward) का अनुपात उतना बेहतर नहीं है, और बाजार में उथल-पुथल (choppy trading) जारी रह सकती है। अगर कीमतें सपोर्ट लेवल (support level) तोड़ती हैं तो फिर से लिक्विडेशन का खतरा बढ़ सकता है।