भू-राजनीति, फेड और मार्जिन का डबल अटैक, अब कैसे लौटी चांदी?
9 फरवरी 2026 को इंटरनेशनल स्पॉट सिल्वर की कीमतें 2.91% बढ़कर $80.25 प्रति औंस पर बंद हुईं। यह तेजी ऐसे समय में आई जब कुछ ही हफ्तों पहले मेटल भारी बिकवाली के दबाव में था। दरअसल, इस बड़ी गिरावट की जड़ें अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संभावित सख्त मौद्रिक रुख, मजबूत होते अमेरिकी डॉलर और भू-राजनीतिक तनाव में आई कमी में थीं।
क्या थे गिरावट के मुख्य कारण?
- फेड का हॉकिश रुख: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले चेयरमैन के तौर पर केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के नाम पर मुहर लगने से संकेत मिले कि मौद्रिक नीति और सख्त हो सकती है। इसका सीधा असर अमेरिकी डॉलर पर पड़ा, जो मजबूत हुआ।
- भू-राजनीतिक तनाव में कमी: अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और अमेरिकी राष्ट्रपति के चीन के साथ संबंधों पर सकारात्मक बयानों से सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों (Safe-haven assets) जैसे चांदी की मांग पर असर पड़ा।
- CME मार्जिन में भारी बढ़ोतरी: CME ग्रुप ने चांदी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मार्जिन की जरूरत को 15% से बढ़ाकर 18% कर दिया। इस अचानक और आक्रामक कदम ने लीवरेज्ड पोजीशन वाले ट्रेडर्स पर भारी दबाव डाला, जिससे उन्हें अपनी पोजीशनों को लिक्विडेट (बिकवाली) करना पड़ा। दिसंबर 2025 के मध्य से लेकर फरवरी 2026 की शुरुआत तक चले इस मार्जिन हाइक के दौर ने कीमतों में तेज गिरावट को और बढ़ाया।
मैक्रो इकोनॉमिक हवाएं और ईटीएफ (ETFs) का खेल
चांदी की चाल का ग्लोबल मैक्रो इकोनॉमिक ट्रेंड्स से गहरा नाता है। मजबूत होता US डॉलर इंडेक्स (DXY) ऐतिहासिक रूप से कमोडिटी की कीमतों पर दबाव डालता है, क्योंकि अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए ये महंगी हो जाती हैं। फेडरल रिजर्व की नीतियों के संकेतों के प्रति चांदी का बाजार, खासकर गोल्ड की तुलना में, कहीं ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि इसका बाजार छोटा और सट्टा भागीदारी (Speculative participation) ज्यादा है।
इस दौरान, Edelweiss Silver, SBI Silver और Nippon India Silver जैसे ईटीएफ (ETFs) पर भी भारी दबाव देखा गया, जो कि ग्लोबल कमोडिटी बिकवाली का ही असर था। जनवरी के अंत में गोल्ड-सिल्वर रेश्यो (Gold-Silver Ratio) घटकर 45:1 पर आ गया था, जो ऐतिहासिक रूप से चांदी को गोल्ड के मुकाबले ज्यादा प्रीमियम पर रखे जाने का संकेत देता है, और अक्सर यह ओवरहीटेड (अति उत्साहित) मार्केट का भी इशारा होता है।
विश्लेषकों के बीच भी राय बंटी हुई है। Macquarie ने Q1 2026 के लिए चांदी का टारगेट प्राइस $55 से बढ़ाकर $75 कर दिया है, जबकि 2026 का औसत अनुमान $62 रखा है। वहीं, TD Securities ने 2026 का औसत $65.50/oz रहने का अनुमान लगाया था। यह दर्शाता है कि अल्पकालिक दृष्टिकोणों और दीर्घकालिक संरचनात्मक चालकों के बीच अंतर है। ऐतिहासिक रूप से, 2025-2026 में चांदी ने सप्लाई की कमी और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण $120 प्रति औंस के स्तर को पार करते हुए एक बड़ी रैली देखी थी, जिसके बाद यह तीखी गिरावट आई।
बियरिश केस (Bearish Case): जोखिम और रेगुलेटरी दांव
बाजार की यह अत्यधिक अस्थिरता इसके अंतर्निहित जोखिमों को उजागर करती है। जहां सप्लाई की कमी के संकेत मिले हैं, वहीं चांदी का मोनेटरी और इंडस्ट्रियल मेटल, दोनों के रूप में इस्तेमाल इसे निवेशक भावना और मैक्रो इकोनॉमिक नीतियों में तेज बदलावों के प्रति बेहद संवेदनशील बनाता है। CME ग्रुप द्वारा बार-बार और आक्रामक मार्जिन हाइक एक गंभीर चेतावनी है कि कैसे रेगुलेटरी हस्तक्षेप, खासकर जब सट्टेबाजी ज्यादा हो, तब तेजी को तोड़ सकते हैं।
केविन वॉर्श का फेड चेयरमैन बनना मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता पैदा करता है। उनके सख्त रुख से लिक्विडिटी की स्थिति टाइट हो सकती है, जो चांदी जैसी सट्टा संपत्तियों की मांग को दबाएगी। इसके अलावा, मजबूत होता अमेरिकी डॉलर एक लगातार चुनौती बना हुआ है। गोल्ड के विपरीत, चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड इसे ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ की उम्मीदों से जोड़ती है, जिससे यह किसी भी मंदी के प्रति संवेदनशील हो जाती है। जनवरी के हाई से 40% की तेज गिरावट, जो किसी एक बड़े फंडामेंटल झटके के बिना हुई, पिछली रैली की नाजुकता को दिखाती है, जो शायद टिकाऊ मांग के बजाय सट्टा की अधिकता से प्रेरित थी।
आगे का रास्ता: क्या कहता है अनुमान?
Trading Economics के विश्लेषकों का अनुमान है कि मौजूदा तिमाही के अंत तक चांदी $79.76 प्रति औंस के आसपास कारोबार करेगी, और 12 महीनों में यह $91.05 तक जा सकती है। यह हालिया बिकवाली से इसकी रिकवरी में विश्वास को दर्शाता है। हालांकि, इस आउटलुक को संभावित मैक्रो इकोनॉमिक उथल-पुथल और CME मार्जिन आवश्यकताओं में निरंतर समायोजन को ध्यान में रखते हुए देखना होगा।
निवेशक आगामी US जॉब्स और इन्फ्लेशन रिपोर्ट्स पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, जो फेडरल रिजर्व की नीतियों और प्रीशियस मेटल्स मार्केट की दिशा के बारे में महत्वपूर्ण संकेत देंगे। टाइट मौद्रिक नीति की उम्मीदें, भू-राजनीतिक विकास और लगातार औद्योगिक मांग के बीच का यह खेल चांदी के भविष्य की दिशा तय करेगा, और इसमें फिलहाल अस्थिरता एक प्रमुख विशेषता बनी रहने की संभावना है।