मार्केट में क्यों आई थी भारी गिरावट?
पिछले दिनों चांदी (Silver) की कीमतों में आई 35% से अधिक की भारी गिरावट, जो ₹4,20,000 प्रति किलोग्राम से घटकर ₹2,65,000 प्रति किलोग्राम तक आ गई थी, के पीछे कई बड़े कारण थे। इस उतार-चढ़ाव को CME (Chicago Mercantile Exchange) ने और बढ़ा दिया। जनवरी 2026 के आखिर में, CME ने सिल्वर फ्यूचर्स (Futures) के लिए मार्जिन (Margin) की मांग 15% से अधिक बढ़ा दी। इससे ट्रेडर्स पर पोजीशन लिक्विडेट (Liquidate) करने का दबाव आया। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) को लेकर चिंताएं और ग्लोबल मार्केट में बढ़ती रिस्क एवर्जन (Risk Aversion) ने भी कीमती धातुओं से निवेशकों का भरोसा कम किया।
डिमांड (Demand) और सप्लाई (Supply) का मजबूत आधार
अब कीमतों में रिकवरी का मुख्य कारण चांदी की मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड (Industrial Demand) है। एनालिस्ट्स का मानना है कि ग्लोबल सिल्वर डिमांड का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 50-55%, सोलर एनर्जी (Solar Energy), ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और AI डेटा सेंटर जैसे सेक्टर से आता है। खासकर, सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) में चांदी का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। दूसरी ओर, बाजार में सप्लाई (Supply) की कमी भी कीमतों को सहारा दे रही है।
फ्यूचर्स मार्केट (Futures Market) में दिखी तेजी
इस सेंटिमेंट शिफ्ट (Sentiment Shift) का असर फ्यूचर्स मार्केट (Futures Market) पर भी दिखा। 3 फरवरी 2026 को, COMEX सिल्वर फ्यूचर्स (Futures) ने हालिया निम्न स्तर से 20% से अधिक की छलांग लगाई और $85 प्रति औंस के करीब पहुंच गए। स्पॉट मार्केट में भी 8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जहां कीमतें $82.74 प्रति औंस पर रहीं। यह तेज उछाल बताता है कि मार्केट पार्टिसिपेंट्स (Market Participants) अब लंबी अवधि की डिमांड और सप्लाई की स्थिति को बेहतर मान रहे हैं।