ग्लोबल मार्केट में Silver की चमक फीकी पड़ रही है। निवेशकों के फंड निकालने और वेयरहाउस में भारी स्टॉक होने के कारण चांदी **$54.50** के अपने क्रिटिकल सपोर्ट लेवल पर संघर्ष कर रही है।
चांदी की कीमतों में इस वक्त भारी गिरावट का दौर है, जो निवेशकों की चिंता का सबब बना हुआ है। ग्लोबल एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) से लगातार हो रही निकासी यह साफ दर्शाती है कि संस्थागत निवेशक फिलहाल चांदी से दूरी बनाए हुए हैं और गोल्ड जैसे अन्य सुरक्षित निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।\n\n### सप्लाई का गणित और वेयरहाउस की स्थिति\nकीमतों पर दबाव की एक बड़ी वजह सप्लाई की अधिकता है। लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन के अनुसार, चांदी की लीज रेट्स फिलहाल 0.02% के बेहद निचले स्तर पर हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि बाजार में फिजिकल सिल्वर की प्रचुरता है। जब सप्लाई भरपूर हो, तो कीमतों में किसी भी तरह की शॉर्टेज (Shortage) की उम्मीद खत्म हो जाती है, जो तेजी को रोकती है।\n\n### महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स\nतकनीकी तौर पर चांदी का चार्ट काफी कमजोर दिख रहा है। एनालिस्ट्स की नजरें $54.50 के सपोर्ट लेवल पर टिकी हैं। अगर चांदी इस स्तर को नहीं बचा पाई, तो भाव फिसलकर $48 तक जा सकते हैं। वहीं, अगर रिकवरी की कोशिश होती है, तो $59 से $63 के बीच मजबूत रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ेगा।\n\n### महंगाई और US फेड का असर\nअमेरिकी महंगाई के ताजा आंकड़ों ने ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंका बढ़ा दी है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सीधा असर चांदी जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स पर पड़ता है, क्योंकि निवेशक ब्याज देने वाले विकल्पों की ओर भागते हैं। हालांकि, लॉन्ग टर्म में सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर चांदी की डिमांड बढ़ा सकते हैं, लेकिन फिलहाल मार्केट का रुख सिर्फ महंगाई और इन्वेस्टमेंट आउटफ्लो से तय हो रहा है।\n\nभारतीय निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर आने वाले बयानों पर पैनी नजर रखें, क्योंकि यही ग्लोबल डॉलर की मजबूती और मेटल प्राइसेज की दिशा तय करेंगे।
