अगस्त के महीने में Silver ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है। US Treasury द्वारा बॉन्ड बायबैक ऑपरेशन में बदलाव की घोषणा के बाद चांदी की कीमतें **$70 प्रति औंस** तक पहुंच गई हैं। हालांकि, सोलर और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर की बढ़ती मांग इसे सपोर्ट दे रही है, लेकिन इतनी तेज तेजी के साथ मार्केट में उतार-चढ़ाव का रिस्क भी बना हुआ है।
चांदी की कीमतों में अगस्त के दौरान शानदार रिकवरी देखी गई है और यह लगभग 20% की बढ़त के साथ $70 प्रति औंस के स्तर को छू चुकी है। भारतीय बाजार में भी इसका असर साफ है, जहां मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के फ्यूचर्स ₹2,44,328 प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गए हैं। यह जून 2026 के बाद मेटल की सबसे मजबूत परफॉर्मेंस है।
रैली की मुख्य वजह
इस तेजी के पीछे US फिस्कल पॉलिसी में आया बदलाव सबसे अहम है। US Treasury के लॉन्ग-बॉन्ड बायबैक ऑपरेशंस को दोगुना करने के फैसले से डॉलर कमजोर हुआ है और ट्रेजरी यील्ड्स में गिरावट आई है। चूंकि कीमती धातुओं की कीमत डॉलर में होती है, इसलिए डॉलर के कमजोर होने से यह ग्लोबल खरीदारों के लिए सस्ता हो जाता है। इसके अलावा, चांदी सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक अनिवार्य मैटेरियल है, जिससे पिछले 6 सालों से ग्लोबल सप्लाई डेफिसिट की स्थिति बनी हुई है।
जोखिम और निवेशकों के लिए सलाह
जहां एक तरफ इंडस्ट्रियल मांग मजबूत है, वहीं निवेशकों को यह भी समझना होगा कि 20% की यह तेजी काफी तेज है। चांदी का स्वभाव सोने (Gold) के मुकाबले ज्यादा वोलेटाइल होता है, जिससे अचानक गिरावट की संभावना बनी रहती है। फिलहाल $70 प्रति औंस का स्तर एक साइकोलॉजिकल बैरियर बना हुआ है। यदि मार्केट इस स्तर पर टिक नहीं पाता है, तो इंस्टिट्यूशनल ट्रेडर्स प्रॉफिट बुकिंग कर सकते हैं। इसके अलावा, US फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी और आने वाले इंफ्लेशन डेटा पर बाजार की पैनी नजर है। किसी भी बड़ी पोजीशन से पहले सतर्क रहना और कीमतों में स्टेबलाइजेशन का इंतजार करना ही समझदारी होगी।
