धनतेरस के त्यौहार के ठीक पहले Multi Commodity Exchange (MCX) पर चांदी की कीमतों में करीब **3%** की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे भाव **₹1,78,624** प्रति किलो तक आ गए हैं।
ग्लोबल इकोनॉमी का दबाव
त्योहारी सीजन के बावजूद चांदी में आई यह गिरावट स्थानीय मांग के बजाय ग्लोबल कारकों से प्रेरित है। अमेरिका से आए मजबूत आर्थिक डेटा ने चिंताएं बढ़ा दी हैं कि US Federal Reserve ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है। चूंकि चांदी जैसी कमोडिटी का ट्रेड डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की मजबूती अन्य करेंसी वाले खरीदारों के लिए चांदी को महंगा बना देती है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।
इंडस्ट्रियल डिमांड और वोलाटिलिटी
चांदी केवल निवेश का जरिया नहीं है, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए एक जरूरी कच्चा माल भी है। हालांकि, मौजूदा बाजार सेंटिमेंट काफी सतर्क है। गोल्ड-टू-सिल्वर रेश्यो अभी 79 के करीब है, जो बताता है कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। चांदी में सोने के मुकाबले वोलाटिलिटी काफी अधिक रहती है, जिससे बाजार में अचानक आए बदलावों पर चांदी के दाम बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होते हैं।
आगे की राह
फिलहाल चांदी एक 'हाई-बीटा' एसेट की तरह काम कर रही है। निवेशकों के लिए अगले कुछ हफ्ते काफी अहम रहेंगे, क्योंकि यह देखना होगा कि क्या चांदी अपने टेक्निकल सपोर्ट लेवल को बचा पाती है। लॉन्ग टर्म में सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी सेक्टर से आने वाली डिमांड इस मेटल की चाल तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
