चांदी की कीमतों में गिरावट! 7 दिन की तेजी के बाद आई नरमी, आयात में भी आई भारी कमी

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AuthorAditya Rao|Published at:
चांदी की कीमतों में गिरावट! 7 दिन की तेजी के बाद आई नरमी, आयात में भी आई भारी कमी

चांदी की कीमतों में 7 दिन की लगातार तेजी के बाद आज गिरावट दर्ज की गई। COMEX पर चांदी $64.09 प्रति औंस पर आ गई, जो **1.4%** की नरमी दर्शाती है। भारत में भी चांदी के दाम ₹6,000 गिरकर ₹2.40 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गए। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों के बाद रेट कट की उम्मीदें कम होने से खरीदारी घटी है।

क्यों गिरी चांदी की कीमत?

शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों बाजारों में चांदी की कीमतों में गिरावट देखी गई। COMEX एक्सचेंज पर चांदी $64.09 प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी, जो पिछले सत्र से 1.4% कम है। यह गिरावट उन निवेशकों के लिए एक बदलाव का संकेत है जो पिछले हफ्ते से कीमतों को ऊपर ले जा रहे थे।

भारत में भी टूटा रफ्तार का सिलसिला

भारत के घरेलू बाजार में भी ऐसी ही प्रतिक्रिया देखने को मिली। लगातार सात दिनों की तेजी के बाद, नई दिल्ली में चांदी की कीमतों में ₹6,000 प्रति किलोग्राम की गिरावट आई और यह ₹2.40 लाख पर स्थिर हो गई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह मुनाफावसूली का एक क्लासिक मामला है, जहां व्यापारियों ने कीमती धातुओं में हालिया तेजी के बाद मुनाफा कमाने के लिए अपनी होल्डिंग्स बेच दीं।

अमेरिकी महंगाई डेटा का असर

बाजार की धारणा पर नवीनतम अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का भी असर पड़ा है। जुलाई के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़े उम्मीदों के अनुरूप रहे। इस रिपोर्ट के बाद, कुछ बाजार सहभागियों ने ' rumores पर खरीदो, तथ्य पर बेचो' (buy the rumor, sell the fact) की रणनीति अपनाते हुए बिकवाली की। चूंकि डेटा से फेडरल रिजर्व को ब्याज दर नीति बदलने की तत्काल आवश्यकता का संकेत नहीं मिला, इसलिए आक्रामक दर कटौती की तात्कालिकता कम हो गई है, जिसका अक्सर बुलियन की कीमतों पर अस्थायी दबाव पड़ता है।

आयात में भारी गिरावट

निवेश गतिविधि से परे, भारतीय चांदी बाजार आयात की बदलती गतिशीलता से भी जूझ रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई में भौतिक आयात में 66.1% की साल-दर-साल गिरावट आई है, जो $171.68 मिलियन तक पहुंच गया। यह रुझान मई 2026 में सरकार द्वारा कीमती धातुओं पर आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% करने के फैसले से जुड़ा है। आयातकों के लिए उच्च लागत भौतिक खरीद को हतोत्साहित कर सकती है, जिससे समग्र मांग प्रभावित होती है।

दोहरी भूमिका का असर

चांदी अक्सर सोने की तुलना में एक अनूठी चुनौती का सामना करती है, क्योंकि इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर पैनल निर्माण और ऑटोमोटिव घटकों जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में भारी मात्रा में होता है। निवेश संपत्ति और औद्योगिक कमोडिटी दोनों के रूप में इस दोहरी भूमिका के कारण, मूल्य रुझान अक्सर दो ताकतों के बीच फंसे रहते हैं। जहां निवेश की मांग ब्याज दरों और केंद्रीय बैंक की नीतियों के प्रति संवेदनशील है, वहीं औद्योगिक मांग वैश्विक विनिर्माण अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य से closely जुड़ी हुई है।

निवेशक अब यह जानने के लिए आगामी वैश्विक आर्थिक रिपोर्टों को देख रहे हैं कि क्या वर्तमान सुधार एक अल्पकालिक विराम है या एक लंबी अवधि का रुझान। बाजार के लिए मुख्य निगरानी योग्य यह होगी कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच औद्योगिक मांग कैसे बनी रहती है, साथ ही अमेरिकी मौद्रिक नीति की दिशा पर भविष्य के अपडेट भी देखे जाएंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.