Silver Prices में भारी गिरावट: फेडरल रिजर्व की सख्ती और मजबूत डॉलर का डबल अटैक

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Silver Prices में भारी गिरावट: फेडरल रिजर्व की सख्ती और मजबूत डॉलर का डबल अटैक
Overview

चांदी की कीमतों में आज बड़ी गिरावट देखी गई। **5.59%** की भारी गिरावट के साथ, भारत में चांदी ₹230 प्रति ग्राम और ₹22,9810 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। इस बड़ी सेंध के पीछे कई बड़े वैश्विक कारण रहे।

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फेड की 'हॉकिश' पॉलिसी से चांदी पर दबाव

2 अप्रैल 2026 को चांदी की कीमतों में 5.59% की गिरावट दर्ज की गई, जो ₹230 प्रति ग्राम और ₹22,9810 प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई। यह गिरावट केवल भू-राजनीतिक चिंताओं से कहीं ज्यादा बड़ी है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) ने संकेत दिया है कि वह इस साल ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा। दुनिया भर के अन्य केंद्रीय बैंक भी इसी राह पर चलते दिख रहे हैं। इस 'हॉकिश' (hawkish) रुख के कारण चांदी जैसी संपत्तियां, जो कोई ब्याज नहीं देतीं, कम आकर्षक हो गई हैं। इसके अलावा, डॉलर इंडेक्स (DXY) भी कई महीनों के उच्च स्तर के करीब है, जिसने चांदी पर और दबाव डाला है।

डॉलर की मजबूती ने भू-राजनीतिक जोखिमों को पीछे छोड़ा

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने भी कीमतों को प्रभावित किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की टिप्पणियों ने क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाया और ब्रेंट क्रूड ऑयल जैसी कमोडिटीज की कीमतें $85 प्रति बैरल के पार चली गईं। आमतौर पर, ऐसी घटनाएं महंगाई से बचाव (inflation hedge) के तौर पर कीमती धातुओं में तेजी लाती हैं। हालांकि, इस बार अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भू-राजनीतिक चिंताओं के प्रभाव को काफी हद तक कम कर दिया। मजबूत डॉलर चांदी को अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए महंगा बना देता है, जिससे उसकी मांग घट जाती है।

सोना-प्लैटिनम से भी ज्यादा गिरी चांदी

2 अप्रैल 2026 को चांदी में आई 5.59% की गिरावट, सोने के लगभग 0.9% और प्लैटिनम के 2.1% की गिरावट से कहीं ज्यादा बड़ी थी। यह प्रमुख कीमती धातुओं पर मजबूत डॉलर और बढ़ती ब्याज दरों के अनुमानों के व्यापक दबाव को दर्शाता है। हाल ही में, प्रमुख सिल्वर-backed एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETFs) में निवेशकों ने अपनी पोजीशन का पुनर्मूल्यांकन करते हुए शुद्ध निकासी (net outflows) देखी है। चांदी की यह तेज गिरावट ब्याज दर में बदलाव और डॉलर की मजबूती के प्रति उसकी अधिक संवेदनशीलता को उजागर करती है, जिससे 'सुरक्षित आश्रय' (safe haven) के रूप में उसकी अपील पर सवाल उठ रहे हैं।

आर्थिक बदलावों के प्रति चांदी की भेद्यता

चांदी के हालिया प्रदर्शन से प्रमुख आर्थिक बदलावों के सामने उसकी कमजोरी साफ दिखती है। सोने के विपरीत, जो मूल्य का एक प्राथमिक भंडार है, चांदी की कीमत औद्योगिक मांग, ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती से काफी प्रभावित होती है। फेडरल रिजर्व का दरों को ऊंचा रखने का फैसला चांदी के लिए निराशाजनक है। हालांकि भू-राजनीतिक घटनाएं अस्थायी रूप से कीमतों को बढ़ा सकती हैं, लेकिन फेड की नीतियों द्वारा समर्थित अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती एक बड़ी चुनौती पेश करती है। इंडसइंड सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी का अनुमान है कि वैश्विक रुझानों के आधार पर आगे और गिरावट की आशंका के चलते MCX सिल्वर मई फ्यूचर्स ₹234,000 प्रति किलोग्राम तक गिर सकते हैं। खुदरा निवेशकों को मुद्रा की चाल और केंद्रीय बैंक की नीतियों पर ध्यान देना चाहिए, जो फिलहाल तात्कालिक सुर्खियों से कहीं ज्यादा प्रभावशाली हैं।

चांदी की कीमतों का अगला कदम

विश्लेषकों का अनुमान है कि निकट भविष्य में चांदी की कीमतें एक सीमित दायरे में कारोबार करेंगी। यह रुझान मध्य पूर्व में जारी अनिश्चितताओं, मजबूत अमेरिकी डॉलर और केंद्रीय बैंकों की 'हॉकिश' नीतियों से तय होगा। निवेशकों को मध्य पूर्व के घटनाक्रमों और तेल की कीमतों पर उनके प्रभाव के साथ-साथ अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर योजनाओं में किसी भी बदलाव पर नजर रखनी चाहिए। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे व्यापार मार्गों के खुलने जैसी घटनाएं भी तेल और कीमती धातुओं के बाजारों को प्रभावित कर सकती हैं। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों दोनों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि आर्थिक दबाव और भू-राजनीतिक जोखिम का यह मिश्रण चांदी की कीमतों में वृद्धि के लिए एक चुनौतीपूर्ण माहौल प्रस्तुत करता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.