Multi Commodity Exchange (MCX) पर 4 नवंबर, 2026 को सिल्वर की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दिवाली की मांग और ग्लोबल मार्केट में हलचल के बीच निवेशक कंफ्यूज हैं कि क्या यह सही समय है।
दिवाली और धनतेरस के इस शुभ सीजन में सिल्वर मार्केट में अजीब सी अनिश्चितता छाई हुई है। MCX पर ट्रेडिंग के दौरान कीमतों में एक ही सत्र में बड़ा अंतर देखने को मिला। कहीं कीमतें ₹1,86,890 प्रति किलो तक जाती दिखीं, तो वहीं कुछ रिपोर्ट्स में यह ₹1,77,985 प्रति किलो के स्तर पर फिसलती नजर आईं। यह अस्थिरता साफ इशारा कर रही है कि कमोडिटी फ्यूचर्स इस वक्त काफी जोखिम भरे हैं।\n\n### मार्केट में क्यों है उथल-पुथल?\nइसकी दो बड़ी वजहें हैं। पहली है घरेलू डिमांड—त्योहारी सीजन में चांदी के सिक्के और गहनों की मांग बढ़ी है। दूसरी है ग्लोबल फैक्टर, जहां अमेरिकी मिड-टर्म इलेक्शन के नतीजों और डॉलर की चाल ने मार्केट को उलझा रखा है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो कीमती धातुओं में अचानक बड़े एडजस्टमेंट देखने को मिलते हैं।\n\n### सावधान: फ्यूचर्स और फिजिकल का अंतर समझें\nनिवेशकों को यह समझना जरूरी है कि MCX का रेट केवल 'फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट' का भाव है। अगर आप बाजार से फिजिकल चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो उसमें मेकिंग चार्ज, GST और डीलर मार्जिन जुड़ने के बाद भाव MCX रेट से काफी ज्यादा होता है। सिर्फ स्क्रीन पर दिख रहे भाव को अपनी बजट प्लानिंग का आधार न बनाएं।\n\n### रिस्क का गणित\nजो ट्रेडर लिवरेज (उधार) लेकर चांदी में ट्रेडिंग कर रहे हैं, उनके लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है। बाजार की ऐसी तेज हलचल अचानक 'मार्जिन कॉल' ट्रिगर कर सकती है, जिससे आपका पोर्टफोलियो प्रभावित हो सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों को सलाह है कि वे सीजनल डिमांड के इस छोटे उछाल के पीछे न भागें, क्योंकि ग्लोबल प्रेशर अभी भी बरकरार है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या सिल्वर एक स्टेबल रेंज पकड़ पाती है या नहीं।
