औद्योगिक मांग की वजह से चांदी चमकी
Silver की कीमतों में आई यह तूफानी तेज़ी, जो 13 मई 2026 को 6.22% बढ़कर ₹296,430 प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई, मुख्य रूप से औद्योगिक गतिविधियों में सुधार की उम्मीदों के कारण हुई है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे कई सेक्टर्स में Silver का भारी उपयोग होता है। बेहतर वैश्विक मांग की संभावनाओं ने इस कीमती धातु को करीब दो महीने के उच्च स्तर, यानी $87 प्रति औंस, के पार पहुंचा दिया।
एक्सपर्ट्स की 'री-प्राइसिंग' पर चेतावनी
बाज़ार के जानकारों ने हालांकि इस तेज़ी पर सावधानी बरतने की सलाह दी है। कोटक सिक्योरिटीज (Kotak Securities) के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च हेड, अनिंद्य बनर्जी (Anindya Banerjee) के अनुसार, घरेलू कीमतों में यह हलचल किसी फंडामेंटल रैली का संकेत नहीं है। उनका मानना है कि यह नए इम्पोर्ट पैरिटी लेवल के हिसाब से कीमतों का एक 'मैकेनिकल री-प्राइसिंग' (mechanical re-pricing) है, जिसमें इम्पोर्ट ड्यूटी अब कीमत में एक फिक्स्ड कॉस्ट के तौर पर शामिल हो गई है।
लंबी अवधि का नज़रिया और निवेश की सलाह
भविष्य में, भारत में Silver की कीमतों पर अंतर्राष्ट्रीय स्पॉट Silver रेट्स, USD/INR एक्सचेंज रेट और इम्पोर्ट पैरिटी के मुकाबले घरेलू प्रीमियम या डिस्काउंट का असर दिखेगा। टाटा म्यूचुअल फंड्स (Tata Mutual Funds) के विश्लेषकों का मानना है कि Silver एक उभरती हुई ग्रोथ स्टोरी (growth story) है, और इसकी लॉन्ग-टर्म चाल औद्योगिक मांग में व्यापक सुधार पर निर्भर करेगी। कमोडिटी की अस्थिर प्रकृति को देखते हुए, वे मीडियम से लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए 'स्टैगर्ड इन्वेस्टमेंट अप्रोच' (staggered investment approach) यानी धीरे-धीरे निवेश करने की सलाह देते हैं।
