1 जुलाई 2026 को भारत में चांदी की कीमतों में 2.47% की भारी गिरावट आई, जो ₹222,700 प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना और ट्रेजरी यील्ड का बढ़ना कीमती धातुओं पर दबाव बना रहे हैं।
क्या हुआ?
1 जुलाई 2026 को भारत में चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। एक किलोग्राम चांदी की कीमत अब ₹222,700 हो गई है, जो पिछले दिन के मुकाबले ₹5,650 कम है। इससे एक ग्राम चांदी का भाव लगभग ₹223 हो गया है। कमोडिटी मार्केट में आई इस 2.47% की गिरावट ने खुदरा खरीदारों और चांदी में निवेश करने वालों, दोनों को प्रभावित किया है।
कीमतों में क्यों आई गिरावट?
इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का भाव डॉलर में तय होता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए चांदी खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे आमतौर पर वैश्विक मांग कम हो जाती है। इसके अलावा, वित्तीय बाजारों में भी सतर्कता का माहौल है क्योंकि निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित मॉनेटरी टाइटनिंग (मौद्रिक सख्ती) की तैयारी कर रहे हैं।
ब्याज दरों का असर
निवेशक हमेशा अपने पैसे को निवेश करने के लिए सबसे अच्छी जगह की तलाश में रहते हैं। वे चांदी जैसी कीमती धातुओं की तुलना उन संपत्तियों से करते हैं जिनसे नियमित ब्याज मिलता है, जैसे कि अमेरिकी सरकारी बॉन्ड। हाल ही में, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज) में बढ़ोतरी देखी गई है। जब बॉन्ड बेहतर रिटर्न देते हैं, तो वे चांदी की तुलना में निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक विकल्प बन जाते हैं। पूंजी के इस बदलाव से अक्सर चांदी जैसी धातुओं की कीमतों में गिरावट आती है।
भू-राजनीतिक कारक और कच्चा तेल
हालांकि चांदी पर फिलहाल दबाव है, अन्य कमोडिटीज (वस्तुएं) अलग तरह से चल रही हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है, WTI क्रूड $70.13 प्रति बैरल पर पहुंच गया है। यह वृद्धि बड़े पैमाने पर भू-राजनीतिक चिंताओं से जुड़ी है, खासकर ईरान द्वारा अमेरिकी अधिकारियों के साथ सीधी बातचीत से इनकार करने के बाद। ऐसे तनाव अक्सर मध्य पूर्व में स्थिरता के डर को बढ़ाते हैं, जो तेल की कीमतों को बढ़ा सकते हैं। हालांकि, ये जोखिम अभी तक चांदी की कीमतों को बढ़ाने के लिए पर्याप्त नहीं रहे हैं, क्योंकि मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दर की उम्मीदें वर्तमान में बाजार में हावी हैं।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
चांदी की कीमतों की अल्पकालिक दिशा संभवतः संयुक्त राज्य अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी, विशेष रूप से रोजगार डेटा। यह डेटा बाजार को यह समझने में मदद करेगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कैसे बदलाव कर सकता है। यदि अर्थव्यवस्था में लगातार मजबूती बनी रहती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है, जो चांदी की कीमतों पर दबाव जारी रख सकता है। दीर्घकालिक निवेशकों के लिए, इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों से औद्योगिक मांग एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है, क्योंकि यह अक्सर निवेश मांग कमजोर होने पर भी चांदी को सहारा प्रदान करती है।
