Silver Prices: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में 22 साल की उछाल, चांदी की कीमतों पर भारी दबाव

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Silver Prices: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में 22 साल की उछाल, चांदी की कीमतों पर भारी दबाव

US Treasury Yields में बढ़ोतरी और Federal Reserve द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदों के बीच Silver की चमक फीकी पड़ रही है। हालांकि, एनर्जी कीमतों में नरमी से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन ग्लोबल एक्सचेंजों पर मिला-जुला इन्वेंट्री डेटा निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

ग्लोबल मार्केट में सिल्वर इस समय एक कठिन दौर से गुजर रही है, जिसमें सितंबर महीने के दौरान कीमतों में 4% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट की मुख्य वजह ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में आई तेजी है, जिसके चलते निवेशकों का रुझान सोने-चांदी जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स से कम हो रहा है।

बॉन्ड मार्केट की चुनौती

30-वर्षीय US Treasury Yield बढ़कर 5.44% के स्तर पर पहुंच गई है, जो साल 2004 के बाद से उच्चतम स्तर है। निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड में निवेश करना सुरक्षित और स्थिर रिटर्न का जरिया बन गया है, जबकि सिल्वर पर कोई फिक्स्ड इंटरेस्ट या डिविडेंड नहीं मिलता। इस बदलाव के कारण पूंजी का प्रवाह बॉन्ड मार्केट की ओर हो गया है, जो चांदी की कीमतों को लगातार नीचे खींच रहा है।

फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का असर

कमोडिटी मार्केट के लिए Federal Reserve का रुख इस वक्त सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। सेंट्रल बैंक के संकेतों के मुताबिक, महंगाई पर लगाम लगाने के लिए और रेट हाइक जरूरी हो सकते हैं। मार्केट में अक्टूबर की मीटिंग में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 66% लगाई जा रही है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो US Dollar मजबूत होता है, जिससे डॉलर में डिनॉमिनेटेड कमोडिटीज अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए महंगी हो जाती हैं और डिमांड पर असर पड़ता है।

एनर्जी और भू-राजनीतिक समीकरण

एनर्जी कीमतों में हालिया नरमी ने राहत दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर डिप्लोमैटिक डील की चर्चाओं से ऑयल की कीमतें $110 प्रति बैरल के पीक से नीचे आई हैं। लेकिन अगर कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं, तो एनर्जी की बढ़ती कीमतें फिर से महंगाई को हवा दे सकती हैं, जिससे फेडरल रिजर्व को सख्त मॉनेटरी पॉलिसी अपनानी पड़ सकती है।

मार्केट का सेंटीमेंट

सप्लाई के मामले में स्थितियां मिश्रित हैं। जहां COMEX में रजिस्टर्ड इन्वेंट्री में भारी कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ शंघाई में सिल्वर वारंट स्टॉक 2024 की शुरुआत के बाद से सबसे ऊंचे स्तर पर हैं। फिलहाल, निवेशक $65 प्रति औंस के रेजिस्टेंस लेवल पर नजर बनाए हुए हैं। अक्टूबर की फेडरल रिजर्व मीटिंग का नतीजा ही तय करेगा कि सिल्वर में यह गिरावट जारी रहेगी या मार्केट में कोई नया ट्रेंड देखने को मिलेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.