ग्लोबल मार्केट में चांदी के दाम **11** महीने के निचले स्तर पर आ गए हैं। अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका के बीच निवेशकों की बिकवाली से भारत में स्पॉट चांदी **5.7%** लुढ़क गई है।
बाजार में मची हलचल
30 अक्टूबर को चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट देखी गई और यह 11 महीनों में पहली बार $50 प्रति औंस के अहम स्तर से नीचे गिर गई। फिलहाल चांदी $49.68 प्रति औंस के पास कारोबार कर रही है, जिसने चार्ट पर एक बड़ा सपोर्ट लेवल तोड़ दिया है।
भारतीय बाजारों पर असर
ग्लोबल गिरावट का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा है। भारत में स्पॉट चांदी के दाम 5.70% गिरकर ₹1,82,442 प्रति किलोग्राम पर आ गए हैं, यानी एक ही दिन में चांदी ₹11,000 से ज्यादा सस्ती हो गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी दिसंबर वायदा (Futures) 4.52% की गिरावट के साथ ₹1,80,885 प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। इस गिरावट से Zerodha, DSP और HDFC जैसे फंड हाउस द्वारा मैनेज किए जा रहे सिल्वर ETF पर दबाव बढ़ा है, जिन्होंने पिछले 6 महीनों में 18% तक का नुकसान दर्ज किया है।
क्यों गिर रही है चांदी?
इस बिकवाली की सबसे बड़ी वजह अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें हैं। जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व दरों को ऊंचा रखने का संकेत देता है, तो सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़ जाती है। चांदी और सोना, जो कोई ब्याज नहीं देते, वे बॉन्ड के मुकाबले निवेशकों को कम आकर्षक लगने लगते हैं।
इंडस्ट्रियल डिमांड का रिस्क
सोने के विपरीत, चांदी का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर पैनल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बहुत ज्यादा होता है। ग्लोबल सुस्ती की आहट से औद्योगिक मांग घटने का डर है, जो चांदी की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना रहा है।
आगे क्या देखना होगा?
अब निवेशकों की नजर अमेरिका के लेबर मार्केट डेटा और नॉन-फार्म पेरोल आंकड़ों पर है, जो फेडरल रिजर्व के अगले फैसलों की दिशा तय करेंगे। भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी राजनीतिक घटनाक्रम भी आगे चांदी की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
