चांदी की कीमतों में लगातार 5वें दिन गिरावट, डॉलर की मजबूती बनी वजह

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
चांदी की कीमतों में लगातार 5वें दिन गिरावट, डॉलर की मजबूती बनी वजह

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MCX पर चांदी के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स में लगातार पांचवें दिन गिरावट आई है और यह ₹2.33 लाख प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। डॉलर के मजबूत होने और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स (Treasury Yields) के बढ़ने के कारण ऐसा हो रहा है, वहीं पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का भी असर दिख रहा है। निवेशक डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ रहा है।

क्या हुआ?

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स लगातार पांचवें दिन गिरते हुए ₹2.33 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर पर बंद हुए। जुलाई डिलीवरी वाले कॉन्ट्रैक्ट में 0.72% की गिरावट आई और यह ₹2,33,800 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। यह लगातार गिरावट बताती है कि बाजार की बदलती परिस्थितियों के कारण कीमती धातुओं में निवेशकों की दिलचस्पी कम हो रही है।

डॉलर क्यों डाल रहा चांदी पर दबाव?

चांदी की कीमतों पर फिलहाल मजबूत हो रहे अमेरिकी डॉलर और बढ़ते ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड्स का दबाव है। वित्तीय बाजारों में, आमतौर पर अमेरिकी डॉलर और चांदी व सोने जैसी कमोडिटीज के बीच विपरीत संबंध होता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं वाले अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए डॉलर-डेनॉमिनेटेड एसेट्स (Dollar-denominated assets) खरीदना महंगा हो जाता है। इस घटी हुई खरीद क्षमता के कारण अक्सर चांदी की मांग कम हो जाती है।

इसके अलावा, उच्च ट्रेजरी यील्ड्स बॉन्ड्स को कीमती धातुओं की तुलना में निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाते हैं। चूंकि चांदी कोई ब्याज या डिविडेंड (Dividend) उत्पन्न नहीं करती है, इसलिए निवेशक अक्सर उच्च ब्याज दरों या यील्ड्स के समय सरकारी बॉन्ड जैसे यील्ड-बेयरिंग एसेट्स (Yield-bearing assets) को प्राथमिकता देते हैं। पूंजी का यह बदलाव वर्तमान मूल्य कमजोरी का एक प्रमुख कारण है।

भू-राजनीतिक कारक

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार की भावनाओं को प्रभावित किया है। हाल ही में सैन्य गतिविधियों और ऊर्जा आपूर्ति में संभावित व्यवधानों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास, को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। हालांकि कीमती धातुओं को पारंपरिक रूप से भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौरान एक सुरक्षित ठिकाना (Safe haven) माना जाता है, लेकिन वर्तमान माहौल अनूठा है। मुद्रास्फीति (Inflation) का डर और फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा अधिक आक्रामक मौद्रिक नीति प्रतिक्रिया की संभावना वर्तमान में चांदी की सुरक्षित-ठिकाना मांग पर हावी हो रही है।

वैश्विक बाजार का संदर्भ

अंतर्राष्ट्रीय बाजार भी इसी प्रवृत्ति को दर्शा रहे हैं। Comex पर जुलाई डिलीवरी वाले चांदी फ्यूचर्स में 1.48% की गिरावट आई और यह 63.78 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। इसी अवधि में सोने की कीमतों में भी लगभग 1% की गिरावट देखी गई। अमेरिकी डॉलर में वैश्विक प्रवाह बताता है कि निवेशक वर्तमान में कीमती धातुओं द्वारा प्रदान की जाने वाली पारंपरिक हेजिंग (Hedging) की तुलना में मुद्रा की सुरक्षा और तरलता को प्राथमिकता दे रहे हैं।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

कमोडिटी बाजार पर नजर रखने वालों के लिए, ध्यान आर्थिक संकेतकों और केंद्रीय बैंक की नीतियों पर बना हुआ है। अमेरिका के प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) के आगामी आंकड़े एक महत्वपूर्ण संकेतक होंगे, क्योंकि यह मुद्रास्फीति के रुझानों पर ताजा डेटा प्रदान करेगा। इसके अतिरिक्त, फेडरल रिजर्व के अधिकारियों द्वारा ब्याज दरों के भविष्य के बारे में कोई भी टिप्पणी महत्वपूर्ण होगी। यदि मुद्रास्फीति ऊंची बनी रहती है, तो उम्मीद है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, जो चांदी की कीमतों पर दबाव जारी रख सकती हैं। इसके विपरीत, मुद्रास्फीति में नरमी के कोई भी संकेत या ब्याज दर के दृष्टिकोण में बदलाव कीमती धातुओं के बाजार में वर्तमान प्रवृत्ति को बदल सकता है।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.