दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में **₹4,000** की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह **₹1.98 लाख** प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। 10 महीने में पहली बार चांदी इस मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसली है, जबकि गोल्ड के दाम स्थिर बने हुए हैं।
चांदी की कीमतों में क्यों है हलचल?
दिल्ली के बाजार में चांदी में यह तेज गिरावट ग्लोबल मार्केट के ट्रेंड्स को दर्शाती है। ₹1.98 लाख प्रति किलोग्राम का भाव 10 महीने का सबसे निचला स्तर है। जानकारों का मानना है कि ग्लोबल स्तर पर बिकवाली का दबाव चांदी पर अधिक हावी रहा है।
गोल्ड क्यों है स्थिर?
जहां चांदी में भारी गिरावट देखी गई, वहीं सोने (Gold) ने अपनी बढ़त को बरकरार रखा है। बुलियन मार्केट में निवेशक फिलहाल फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की आने वाली पॉलिसी मीटिंग है, जिसका बाजार को बेसब्री से इंतजार है। केंद्रीय बैंकों के फैसलों का सीधा असर ब्याज दरों और करेंसी वैल्यू पर पड़ता है, जिससे निवेशक बड़ी चाल चलने से पहले रुकना बेहतर समझ रहे हैं।
डॉलर की मजबूती और दबाव
कीमती धातुओं में इस उतार-चढ़ाव के पीछे सबसे बड़ी वजह डॉलर की मजबूती है। चूंकि कमोडिटी मार्केट में खरीदारी डॉलर में होती है, इसलिए डॉलर के महंगा होने से अन्य मुद्राओं के खरीदारों के लिए यह महंगी पड़ती है। चांदी के साथ दिक्कत यह है कि यह केवल निवेश ही नहीं, बल्कि एक इंडस्ट्रियल मेटल भी है। जब ग्लोबल इकोनॉमिक सेंटिमेंट कमजोर होता है, तो औद्योगिक मांग (Industrial Demand) में गिरावट का असर चांदी पर सोने की तुलना में तेजी से दिखता है।
अब सबकी नजरें फेडरल रिजर्व की कमेंट्री पर टिकी हैं। यदि वहां से ब्याज दरों को लेकर कोई संकेत मिलता है, तो डॉलर की चाल तय होगी और उसी आधार पर आने वाले दिनों में गोल्ड और चांदी की कीमतों का रुख साफ होगा।
