ग्लोबल मार्केट में बिकवाली का तूफान, भारत भी अछूता नहीं
वैश्विक बाजारों से मिल रहे चिंताजनक संकेतों और स्पेकुलेटिव पोजीशन में बड़ी बिकवाली (unwinding) के चलते आज चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखा। शुक्रवार को COMEX पर चांदी के फ्यूचर्स (futures) में भारी गिरावट आई, जो शुरुआती कारोबार में लगभग 9.6% गिरकर $64.1 प्रति औंस के स्तर तक पहुंच गए थे। हालांकि, बाद में इनमें कुछ सुधार हुआ और ये $70 के स्तर के ऊपर कारोबार करने लगे।
बिकवाली की मुख्य वजहें
विश्लेषकों का मानना है कि जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद, ट्रेडर्स अपनी स्पेकुलेटिव पोजीशन को बेच रहे हैं। भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितताएँ और फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर चिंताएं, खासकर चीन से हुई भारी खरीदारी, अब बिकवाली का कारण बन रही हैं। डॉलर का मजबूत होना और फेडरल रिजर्व में केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के नॉमिनेशन ने भी सेंटिमेंट को बदला है, जिससे बड़ी मात्रा में पोजीशन लिक्विडेट हुईं।
भारतीय बाजार पर असर
भारत में, त्योहारी और शादी सीजन के चलते आमतौर पर चांदी की मांग मजबूत रहती है, जो ज्वैलर्स और रिटेलर्स के लिए अहम होती है। चांदी एक प्रीशियस मेटल होने के साथ-साथ एक इंडस्ट्रियल कमोडिटी भी है, जिसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में होता है। इन डोमेस्टिक डिमांड फैक्टर्स के बावजूद, वैश्विक बाजार में हुई आक्रामक बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा था कि इसने स्थानीय मांग को पीछे छोड़ दिया और कीमतों में भारी गिरावट आई। मौजूदा गिरावट के कारण चांदी अपने जनवरी 29 के शिखर से 40% से ज़्यादा नीचे आ गई है। इसने इस साल की अपनी सारी बढ़त को खत्म कर दिया है और यह दशकों में नहीं देखी गई इतनी बड़ी प्राइस स्विंग (price swing) का संकेत दे रही है।