फेड चेयरमैन की चर्चा से चांदी में भूचाल
बाजार के जानकारों के मुताबिक, चांदी की कीमतों में इस भारी बिकवाली की मुख्य वजह अमेरिका से आई एक खबर है। फेडरल रिजर्व के अगले चेयरमैन के तौर पर केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के नाम की चर्चा ने डॉलर को मजबूती दी है, जिससे चांदी जैसी नॉन-यील्डिंग (Non-yielding) एसेट्स में निवेश की मांग कम हुई है। इसने कीमती धातु पर बिकवाली का दबाव बना दिया।
MCX पर 9% का गोता
गुरुवार, 5 फरवरी 2026 को मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में तेज गिरावट आई। ट्रेडिंग के शुरुआती घंटों में ही चांदी 9% तक टूट गई और करीब ₹2,44,654 प्रति किलोग्राम पर आ गई। यह गिरावट ग्लोबल स्पॉट प्राइसेज (Global Spot Prices) में आई बड़ी गिरावट का ही असर है, जो एक समय 90 डॉलर प्रति औंस के करीब थे और 75 डॉलर के नीचे गिर गए। इस बड़ी गिरावट ने पिछले कुछ दिनों की रिकवरी को मिनटों में खत्म कर दिया।
ETFs में 20% तक का भारी नुकसान
इस भयानक बिकवाली का सीधा असर भारतीय सिल्वर ईटीएफ (Silver ETFs) पर भी पड़ा। फंड्स में 13% से 20% तक की गिरावट दर्ज की गई। इन ईटीएफ में भारी लेवरेज (Leverage) पोजीशन होने की वजह से नुकसान और भी बढ़ गया। 4 फरवरी तक, Nippon AMC Silver ETF में ₹1,300 करोड़ से ज्यादा की लेवरेज पोजीशन थी, और कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, जनवरी के आखिर तक यह लगभग ₹1,750 करोड़ तक पहुंच गई थी। इतना ज्यादा लेवरेज, कीमतों में छोटी सी गिरावट को भी निवेशकों के पोर्टफोलियो के लिए बड़ा नुकसान बना देता है।
ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव का दौर
यह बड़ी उथल-पुथल तब आई है जब जनवरी 2026 में चांदी ने रिकॉर्ड ऊंचाई $121.64 प्रति औंस को छुआ था। इसके बाद से चांदी में ऐतिहासिक वोलेटिलिटी देखने को मिली है। 30 जनवरी 2026 को तो एक ही दिन में 37% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी, और तीन दिनों में कुल 41% की बड़ी गिरावट आई थी। भू-राजनीतिक तनाव भी पहले कीमती धातुओं को सहारा दे रहा था, लेकिन अब मैक्रो इकोनॉमिक (Macroeconomic) बदलाव हावी हो गए हैं।
सोने के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन
जहां चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई, वहीं गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) में 5 फरवरी को 4% से 6% तक की कम गिरावट देखी गई। MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स (Gold Futures) में करीब 1.58% की मजबूती बनी रही, जो सोने की सापेक्षिक मजबूती को दर्शाता है।
भविष्य का अनुमान: मांग बनी रहेगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की सप्लाई में rigidity (कठोरता) भी इसकी कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव का एक कारण है, क्योंकि यह अक्सर अन्य खनन कार्यों का बाय-प्रोडक्ट (By-product) होती है। इस वर्तमान वोलेटिलिटी के बावजूद, लंबी अवधि के लिए आउटलुक (Outlook) उम्मीद भरा है। 2026 के लिए अनुमान है कि चांदी की औसत कीमत $56 से $65 प्रति औंस रह सकती है, और कुछ विश्लेषक $100-$170 प्रति औंस तक के टारगेट भी दे रहे हैं। इसकी वजह AI और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर्स से आने वाली मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड (Industrial Demand) है। हालांकि, बाजार फिलहाल स्पेकुलेटिव पोजीशनिंग (Speculative Positioning) और बड़े लॉन्ग ट्रेड्स (Long Trades) के अनवाइंडिंग (Unwinding) से जूझ रहा है।
विश्लेषकों की राय और टारगेट
Nippon India Silver ETF के लिए 2026 के प्राइस टारगेट ₹300-350 (कंजरवेटिव सिनारियो - Conservative Scenario) से लेकर ₹450-500 (बुल्लिश केस - Bullish Case) तक हैं। हालांकि नियर-टर्म वोलेटिलिटी (Near-term volatility) जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन इस घटना को कुछ लोग फंडामेंटल टर्निंग पॉइंट (Fundamental turning point) के बजाय 'पोजिशनिंग-ड्रिवन रीसेट' (Positioning-driven reset) के तौर पर देख रहे हैं। बाजार स्पेकुलेटिव कैपिटल (Speculative capital), मैक्रो इकोनॉमिक शिफ्ट्स (Macroeconomic shifts) और इंडस्ट्रियल डिमांड के बीच के तालमेल पर बारीकी से नजर रखेगा ताकि चांदी की दिशा का अंदाजा लगाया जा सके।
