चांदी की कीमतों में आई सुनामी!
Silver ने निवेशकों को चौंका दिया है। जनवरी 29, 2026 को ₹4.39 लाख प्रति किलोग्राम के शिखर को छूने के बाद, अप्रैल 28, 2026 तक इसकी कीमत गिरकर लगभग ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम रह गई। यह 45% से अधिक की एक भारी गिरावट है, जो बाजार की प्रचंड वोलैटिलिटी (volatility) और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के कारण और भी तेज हो गई। विश्लेषकों का कहना है कि यह 'अराजक सुधार' (chaotic correction) का दौर है, जिसमें अप्रैल के सिर्फ दस दिनों में ₹25,000 से अधिक का उतार-चढ़ाव देखा गया। अब यह धातु एक सुरक्षित निवेश (safe haven) की बजाय एक जोखिम भरे एसेट (risky asset) की तरह बर्ताव कर रही है।
भू-राजनीति और डिमांड के बीच कशमकश
भू-राजनीतिक अस्थिरता, जिसमें पश्चिम एशिया में संघर्ष और ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि शामिल है, ने इस वोलैटिलिटी को और हवा दी है। अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना और फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी कीमतों पर अतिरिक्त दबाव डाला है। इन बाहरी कारकों ने निवेशकों का ध्यान चांदी की पारंपरिक सुरक्षित निवेश की भूमिका से हटा दिया है। मेटल की वोलैटिलिटी 50% तक पहुंच गई है, जो पिछले 26 सालों में सबसे ज्यादा है, जिससे लगता है कि बाजार चालें सुरक्षित निवेश की मांग से ज्यादा सट्टेबाजी (speculation) से प्रेरित हैं।
लॉन्ग-टर्म आउटलुक अभी भी मजबूत?
हालांकि, लॉन्ग-टर्म की बात करें तो चांदी की फंडामेंटल (fundamental) स्थिति मजबूत दिख रही है। 2026 में 4.63 करोड़ ट्रॉय औंस (troy ounces) की अनुमानित सप्लाई की कमी (supply deficit) कीमतों को सहारा दे सकती है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs), सोलर एनर्जी, AI हार्डवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स से इंडस्ट्रियल डिमांड (industrial demand) भी तेजी से बढ़ रही है। अनुमान है कि अकेले EV की मांग 2031 तक चांदी के वार्षिक उपयोग को दोगुना कर सकती है। सोने (Gold) की तुलना में, जिसने 2026 में अब तक 9.32% का रिटर्न दिया है और अपनी सुरक्षित निवेश की स्थिति बनाए रखी है, चांदी का प्रदर्शन अधिक अप्रत्याशित रहा है, हालांकि हाल के वर्षों में इसने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है।
बढ़ते जोखिम: डिमांड और सट्टेबाजी का खतरा
इस सकारात्मक लॉन्ग-टर्म आउटलुक (outlook) के बावजूद, कुछ बड़े जोखिम भी हैं। J.P. Morgan ने आगाह किया है कि अत्यधिक वोलैटिलिटी के कारण, अगर कीमत-संवेदनशील औद्योगिक खरीदार विकल्प ढूंढ लेते हैं तो डिमांड डिस्ट्रक्शन (demand destruction) हो सकता है। यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होते हैं, तो चांदी अपनी सुरक्षित निवेश की अपील खो सकती है और तेज़ी से गिर सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि बाजार शायद सट्टेबाजी वाले निवेशों को ज्यादा तवज्जो दे रहा है, जो एक जोखिम है अगर फंडामेंटल इसे सही न ठहराएं।
एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई
2026 के लिए एनालिस्टों (analysts) के अनुमानों में बड़ा अंतर है। कुछ रूढ़िवादी अनुमानों के अनुसार, औसत कीमत $56 से $65 प्रति औंस रह सकती है। J.P. Morgan इसे $81 प्रति औंस रहने का अनुमान लगा रहा है। वहीं, Bank of America सप्लाई की भारी कमी और डिमांड दबाव के चलते $309 प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान लगा रही है। आम सहमति यह है कि भले ही अल्पावधि (short-term) में कीमतें आर्थिक बदलावों और वैश्विक घटनाओं के कारण अस्थिर बनी रहें, लेकिन संरचनात्मक सप्लाई की कमी और मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड से लॉन्ग-टर्म में अच्छा सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
