बाजार की वजहें: ईटीएफ निकासी और पॉलिसी का अनिश्चित माहौल
5 फरवरी 2026 को चांदी (Silver) के दाम धड़ाम हो गए। पिछले दो दिनों की तेजी पर पानी फिर गया और भाव लगभग 10% लुढ़क गए। इस बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य कारण चीन के गोल्ड ईटीएफ (ETF) से रिकॉर्ड $1 अरब की निकासी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) की नीतियों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है। फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती को लेकर सतर्क रुख और नई नियुक्तियों को लेकर चल रही अटकलों ने अमेरिकी डॉलर को मजबूत किया, जिससे डॉलर-denominated कमोडिटीज जैसे चांदी पर दबाव पड़ा।
भारत में भी टूटा चांदी का दम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में $78.90 प्रति औंस पर आई इस गिरावट का असर भारत पर भी देखने को मिला। इंडियन बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, देश में चांदी 9.64% घटकर ₹2,52,232 प्रति किलोग्राम पर आ गई। वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी चांदी फ्यूचर्स में करीब 5.6% की गिरावट के साथ ₹2,53,795 प्रति किलोग्राम का कारोबार हुआ।
भू-राजनीतिक टेंशन और सोने का हाल
ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली बातचीत जैसी भू-राजनीतिक खबरें भी बाजार में थोड़ी अनिश्चितता पैदा कर रही थीं, हालांकि वे इस बड़ी बिकवाली की मुख्य वजह नहीं मानी जा रही हैं। इसी बीच, सोने (Gold) के भावों में भी गिरावट आई। भारत में 24 कैरेट सोना 0.84% गिरकर ₹152,000 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। यह दिखाता है कि प्रीशियस मेटल्स में व्यापक तौर पर बिकवाली का दबाव था।
ऐतिहासिक प्रदर्शन और भविष्य का अनुमान
यह गिरावट भले ही अचानक आई हो, लेकिन एक साल पहले की तुलना में अंतरराष्ट्रीय चांदी की कीमतें अभी भी लगभग 144.86% ऊपर हैं। चांदी ने जनवरी 2026 में $121.64 का रिकॉर्ड हाई छुआ था। विश्लेषकों का मानना है कि 5 फरवरी की बिकवाली में फंड्स और लीवरेज का बड़ा हाथ था, न कि फंडामेंटल में कोई बड़ी खराबी आई हो। iShares Silver Trust (SLV) जैसे बड़े सिल्वर ईटीएफ (ETF) में अभी भी काफी निवेश है।
ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान है कि चांदी निकट भविष्य में $74 से $91 प्रति औंस के दायरे में रह सकती है। वहीं, 2026 में सप्लाई डेफिसिट (कमी) और रिन्यूएबल एनर्जी व टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स से बढ़ती औद्योगिक मांग के चलते चांदी $100 प्रति औंस के पार भी जा सकती है। ऐसे में निवेशकों को 'डिप पर खरीदें, रैली पर बेचें' की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है। डॉलर इंडेक्स का 90 के ऊपरी स्तर पर कारोबार करना भी चांदी की चाल पर असर डालेगा, हालांकि 2026 में इसके धीरे-धीरे कमजोर होने का अनुमान है।
