ग्लोबल मार्केट में चांदी की सप्लाई में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। चांदी का स्टॉक **4 साल** के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिसके चलते **2027** तक मार्केट में सरप्लस (Surplus) की स्थिति बनने के आसार हैं।
इन्वेंट्री का बढ़ता बोझ
सितंबर 2026 के अंत तक लंदन के वॉल्ट्स में चांदी का स्टॉक करीब 932 मिलियन ट्रॉय ओंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। केवल लंदन ही नहीं, बल्कि अमेरिका, भारत और चीन के एक्सचेंज स्टॉकपाइल्स में भी चांदी का भंडार तेजी से बढ़ा है। यह संकेत साफ है कि पिछले दो सालों से चली आ रही चांदी की किल्लत अब खत्म हो रही है।
क्यों कम हो रही है डिमांड?
इंडस्ट्रियल सेक्टर, खासकर सोलर एनर्जी कंपनियों ने चांदी की बढ़ती कीमतों से परेशान होकर अब विकल्पों (Substitution) की तलाश शुरू कर दी है। लागत को कम रखने के लिए कंपनियां चांदी की जगह अन्य मेटल्स का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं।
निवेशकों का बदला मिजाज
इन्वेस्टर्स का रुझान भी चांदी से कम होता दिख रहा है। एक्सचेंज ट्रेडेड प्रोडक्ट्स (ETPs) से इस साल करीब 60 मिलियन ओंस की निकासी हुई है, जो दिखाता है कि निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं। वहीं, हाई इंटरेस्ट रेट्स के कारण भी नॉन-यील्डिंग एसेट के तौर पर चांदी की चमक फीकी पड़ रही है। इसके उलट, गोल्ड को सेंट्रल बैंक की खरीदारी का सहारा मिल रहा है, जबकि चांदी पूरी तरह इंडस्ट्रियल साइकिल पर निर्भर है, जिससे इसकी कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
