चांदी में बड़ी उछाल: भू-राजनीतिक चिंताएं कम, पर ये बाधाएं अभी भी हावी!

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AuthorAditya Rao|Published at:
चांदी में बड़ी उछाल: भू-राजनीतिक चिंताएं कम, पर ये बाधाएं अभी भी हावी!
Overview

चांदी की कीमतों में आज **3%** की शानदार तेजी देखी गई, जो **$76.34** प्रति औंस के स्तर पर पहुँच गई। इस उछाल की मुख्य वजह मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनावों के कम होने की उम्मीदों से तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना है।

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भू-राजनीतिक राहत से चांदी को मिली संजीवनी

बीते दिनों में मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक जोखिमों के कम होने के संकेत मिले हैं। संभावित अमेरिका-ईरान शांति वार्ता और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू द्वारा लेबनान के साथ सीधी बातचीत की कोशिशों से बाज़ार में राहत देखी गई। इसके चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट आई और अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 98.70 के आसपास नरम पड़ा। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड भी मामूली गिरे, 10-वर्षीय यील्ड 4.29% और 2-वर्षीय यील्ड करीब 3.785% पर आ गई। इन फैक्टर्स ने सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर डॉलर और बॉन्ड्स की मांग को कम किया, जिससे चांदी की कीमतों को सहारा मिला।

बाज़ार की असलियत: कमजोर नींव और निवेशकों का भरोसा?

हालांकि, हालिया उछाल के बावजूद, कई ऐसे संकेत हैं जो चांदी की इस रिकवरी को नाजुक बना सकते हैं। ग्लोबल सिल्वर ईटीएफ (ETF) होल्डिंग्स घटकर 79.84 करोड़ औंस के चार महीने के निचले स्तर पर आ गई हैं। यह दिसंबर 2025 के उच्चतम स्तर से 8.38% की गिरावट है। फरवरी के अंत में ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से निवेशकों ने लगभग 3.6 करोड़ औंस चांदी बेची है, और इस साल कुल आउटफ्लो 6.5 करोड़ औंस हो चुका है।

दूसरी ओर, COMEX में रजिस्टर्ड सिल्वर इन्वेंटरी सितंबर 2025 के अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से 61.7% गिरी है, जो फिजिकल सप्लाई में तंगी दिखाती है। यह गिरावट कीमतों को सहारा दे सकती है, लेकिन निवेशक अभी तक वापस नहीं लौटे हैं।

सोना (Gold) इसी दौरान $2,737 का नया रिकॉर्ड स्तर छूकर मजबूत बना हुआ है, जो दिखाता है कि निवेशक इसे चांदी से ज़्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। 2025 में चांदी ने सोने को पछाड़ते हुए बड़ी उछाल दिखाई थी, लेकिन इसकी ऐतिहासिक अस्थिरता (Volatility) एक बड़ा अंतर है।

फेड का कड़ा रुख और महंगाई का डर

फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की मार्च मीटिंग के मिनट्स से पता चला है कि नीति निर्माता महंगाई और नौकरी के जोखिमों के कारण ब्याज दरों (Interest Rates) को ऊंचा रखने के पक्ष में हैं। फेड ने मार्च 2026 में अपनी पॉलिसी रेट को 3.5%-3.75% पर स्थिर रखा था, और अनुमान है कि 2026 तक दरें ऊंची बनी रह सकती हैं, संभवतः 2027 में कुछ और बढ़ोतरी के साथ। ऊर्जा और सप्लाई चेन की दिक्कतों से बढ़ी महंगाई की चिंताएं, उन कमोडिटीज के लिए मुश्किल माहौल बनाती हैं जो ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील हैं। फेड का लक्ष्य 2% कोर इन्फ्लेशन हासिल करना है, लेकिन उम्मीद है कि यह 2026 के अंत तक ही संभव हो पाएगा, और इससे ज़्यादा समय भी लग सकता है।

आगे क्या है चांदी के लिए?

विश्लेषकों का मानना ​​है कि चांदी की रिकवरी भू-राजनीतिक तनाव के और कम होने और तेल की कीमतों में गिरावट पर निर्भर करेगी। अगर कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं तो यह $85 तक जा सकती है। एक टिकाऊ रैली के लिए, सुरक्षित निवेश की वापसी और ईटीएफ (ETF) में नए पैसे का आना ज़रूरी है। $78 के स्तर को निर्णायक रूप से पार करने के लिए चांदी को कई दिनों तक ऊपर बने रहना होगा, जबकि $72-$69 की रेंज में सपोर्ट देखा जा रहा है। किसी भी गिरावट पर खरीदारी समझदारी हो सकती है, लेकिन मध्य-पूर्व में नए तनाव से तेल की कीमतों में फिर से उछाल चांदी की इस सकारात्मक चाल को तुरंत खत्म कर सकता है।

2026 तक चांदी की सप्लाई में अनुमानित कमी (Supply Deficit) लॉन्ग-टर्म सपोर्ट दे सकती है, लेकिन अल्पावधि में कीमतें भू-राजनीतिक खबरों और सेंट्रल बैंक के फैसलों से तय होंगी।

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