चांदी की कीमतों में बड़ा उछाल, वजह है चीन का घटता भंडार!
बुधवार को MCX सिल्वर फ्यूचर्स में 3% की ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई, जिससे मार्च डिलीवरी वाला कॉन्ट्रैक्ट ₹2,65,821 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया। यह उछाल ग्लोबल मार्केट की उस तस्वीर को दिखाता है जहाँ चांदी की कीमतें हाल ही में $120 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर को छूने के बाद $82-84 प्रति औंस के दायरे में आ गई थीं। फरवरी की शुरुआत से कीमतों में करीब 40% की गिरावट के बावजूद, मौजूदा स्पॉट प्राइस करीब $84.46 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस है, जो बाज़ार की मजबूती को दर्शाता है।
इस ताज़ा तेज़ी का सबसे बड़ा कारण चीन के अंदर चांदी के भंडार का खतरनाक स्तर तक नीचे आ जाना है। शंघाई फ्यूचर एक्सचेंज (SHFE) पर चांदी का स्टॉक घटकर महज़ 350 टन रह गया है, जो 2015 के बाद का सबसे निचला स्तर है। यह जनवरी 2021 के करीब 3,000 टन के शिखर से 88% की भारी गिरावट है। इसके अलावा, 2025 के दौरान चीन से बड़ी मात्रा में चांदी का लंदन को एक्सपोर्ट भी फिजिकल सप्लाई को टाइट कर रहा है।
इंडस्ट्रियल डिमांड का सपोर्ट और ग्लोबल फैक्टर
कीमतों में इस उठापटक के पीछे ग्लोबल सिल्वर मार्केट में लगातार बनी स्ट्रक्चरल कमी है। सिल्वर इंस्टीट्यूट का अनुमान है कि 2026 में यह कमी 67 मिलियन औंस तक पहुंच सकती है, जो लगातार छठा साल होगा जब सप्लाई डिमांड से कम रहेगी। इसकी एक बड़ी वजह इंडस्ट्रियल सेक्टर की लगातार बढ़ती मांग है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में चांदी का इस्तेमाल बहुत ज़रूरी है। भले ही बढ़ी कीमतों के कारण सोलर पैनल में चांदी का इस्तेमाल कम करने या विकल्प खोजने की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिफिकेशन के बढ़ते चलन से इसकी मांग बनी रहने की उम्मीद है। अनुमान है कि अकेले EV सेक्टर को 2026 तक 70-75 मिलियन औंस चांदी की ज़रूरत पड़ सकती है।
हालांकि, इस डिमांड की कहानी में कुछ रुकावटें भी हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी एक बड़ा फैक्टर है। ब्याज दरों को लेकर फेड के कड़े रुख से सिल्वर जैसी नॉन-यील्ड एसेट्स पर दबाव पड़ सकता है, क्योंकि इन्हें रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है। यही वजह है कि फरवरी की शुरुआत में कीमतों में गिरावट आई थी। वहीं, यह भी समझना ज़रूरी है कि चीन के एक्सचेंज में भले ही भंडार कम हो, लेकिन 2025 में उसका कुल सिल्वर एक्सपोर्ट 16 साल के उच्चतम स्तर पर था। इससे यह अंदाज़ा लगाना मुश्किल है कि ओवरऑल फिजिकल सप्लाई कितनी टाइट है। गोल्ड-सिल्वर रेशियो 50 से नीचे आ गया है, जो बताता है कि हाल के दिनों में चांदी ने सोने के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है।
एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय: बड़े टारगेट या मंदी का डर?
सिल्वर को लेकर एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। कुछ एनालिस्ट्स 2026 के लिए चांदी की कीमतें $300-$500 प्रति औंस या $180 प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान लगा रहे हैं। वहीं, गोल्डमैन सैक्स 2026 के लिए औसतन $75-$85 प्रति औंस का टारगेट दे रहा है, जबकि जेपी मॉर्गन का अनुमान $81 प्रति औंस है।
इस बुलिशनेस के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, लेकिन कुछ फैक्टर्स एक्सट्रीम तेज़ी पर लगाम लगा सकते हैं। चांदी के इतिहास में बड़ी वोलेटिलिटी (कीमतों में अचानक उछाल और गिरावट) देखी गई है। हालांकि, लगातार स्ट्रक्चरल डेफिसिट और इंडस्ट्रियल डिमांड के चलते चांदी के भावों को मीडियम से लॉन्ग टर्म में सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। सिल्वर इंस्टीट्यूट का अनुमान है कि 2026 में भी सप्लाई की कमी बनी रहेगी। इन्वेस्टमेंट डिमांड, खासकर रिटेल इन्वेस्टर्स से, बढ़ने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर्स, खासकर फेड की पॉलिसी और डॉलर के मूवमेंट्स पर नज़र रखनी होगी, लेकिन सप्लाई-डिमांड का असंतुलन लंबी अवधि के लिए पॉजिटिव संकेत दे रहा है।