Silver Imports Crash: नए लाइसेंस नियम, चांदी की सप्लाई में भारी गिरावट, प्रीमियम ₹50,000 के पार!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Silver Imports Crash: नए लाइसेंस नियम, चांदी की सप्लाई में भारी गिरावट, प्रीमियम ₹50,000 के पार!

भारत में चांदी का इम्पोर्ट (Import) जून महीने में बुरी तरह गिरकर सिर्फ **29 टन** रह गया है, जो जनवरी में **747 टन** था। सरकार के नए और कड़े लाइसेंसिंग नियमों के कारण ऐसा हुआ है। इस गिरावट ने सप्लाई में बड़ी रुकावट पैदा कर दी है, और घरेलू बाज़ार में चांदी की कीमतें (Premiums) कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, ठीक त्योहारी और शादी के सीज़न से पहले।

Detailed Coverage

नए इम्पोर्ट नियमों का असर

सरकार ने मई 2026 में चांदी को 'प्रतिबंधित' कैटेगरी में डाल दिया था, जिसके बाद हर शिपमेंट के लिए खास परमिट लेना ज़रूरी हो गया। हालांकि, इस पॉलिसी का मकसद विदेशी मुद्रा भंडार को मैनेज करना था, लेकिन इसने बड़े इम्पोर्ट करने वाले बैंकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। खबरों के मुताबिक, कई बैंक अभी भी सरकारी मंज़ूरी का इंतज़ार कर रहे हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि मंज़ूरी देने वाली कमेटी महीने में सिर्फ एक या दो बार मिलती है, जिससे सप्लाई चेन में देरी हो रही है। इसके अलावा, थाईलैंड और UAE जैसे देशों से इम्पोर्ट रोकने के लिए 'सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन' जमा करने जैसी नई शर्तों ने ट्रेडर्स के लिए काम और भी मुश्किल बना दिया है।

घरेलू सप्लाई और मांग का फासला

भारत दुनिया के सबसे बड़े चांदी उपभोक्ताओं में से एक है। यहां ज्वेलरी बनाने वाले, चांदी के बर्तन उद्योग और औद्योगिक निर्माताओं से चांदी की भारी मांग रहती है। चूंकि देश में चांदी का उत्पादन बहुत कम होता है, इसलिए अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए यह लगभग पूरी तरह इम्पोर्ट पर ही निर्भर है। सप्लाई में यह रुकावट चिंताजनक है, क्योंकि ज्वैलर्स आमतौर पर अक्टूबर और नवंबर में आने वाले बड़े त्योहारों की तैयारी के लिए जुलाई से ही स्टॉक जमा करना शुरू कर देते हैं। इसके बाद नवंबर से मार्च तक शादियों का सीजन चलता है। अगर लाइसेंस की देरी ऐसे ही जारी रही, तो त्योहारी मांग के हिसाब से सप्लाई न होने पर घरेलू बाज़ार में कीमतों में और ज़्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

रेगुलेटरी पहलू और बाजार का अनुमान

वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि इम्पोर्ट के अनुरोधों पर नए नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है। यह बदलाव सरकार के पिछले प्रयासों का हिस्सा है, जिसमें कीमती धातुओं पर इम्पोर्ट ड्यूटी में बदलाव भी शामिल थे। ज्वेलरी और रिटेल सेक्टर के निवेशक इस बात पर नज़र रखेंगे कि क्या सरकार मंज़ूरी मीटिंग की फ्रीक्वेंसी बढ़ाती है या कोटा आवंटन प्रक्रिया को स्पष्ट करती है। अगला महत्वपूर्ण बिंदु यह देखना होगा कि शादी का सीजन पूरी तरह शुरू होने से पहले इन लाइसेंसिंग की बाधाओं को दूर किया जाता है या नहीं, क्योंकि सप्लाई की लगातार कमी चांदी पर निर्भर व्यवसायों के मुनाफे को और प्रभावित कर सकती है और अंतिम उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ा सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.