Silver Price: Fed Policy और Geopolitical टेंशन का कमाल! कीमतों में दिखा जबरदस्त उतार-चढ़ाव

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AuthorNeha Patil|Published at:
Silver Price: Fed Policy और Geopolitical टेंशन का कमाल! कीमतों में दिखा जबरदस्त उतार-चढ़ाव
Overview

3 फरवरी 2026 को Silver की कीमतों में बड़ा फेरबदल देखने को मिला। जहां Comex पर सिल्वर की कीमतें **4.40%** बढ़कर **$82.70** प्रति औंस पर पहुंच गईं, वहीं भारतीय MCX पर यह हालिया रिकॉर्ड ऊंचाई से गिरकर करीब **₹2.99 लाख** प्रति किलोग्राम पर आ गई।

Fed Policy और Geopolitical टेंशन का डबल असर: Silver की कीमतों में क्यों आया इतना उतार-चढ़ाव?

3 फरवरी 2026 को Silver की मार्केट में एक अनोखी चाल देखने को मिली। एक तरफ, Comex पर कीमती धातु 4.40% की मजबूती के साथ $82.70 प्रति औंस पर बंद हुई। वहीं, दूसरी ओर, भारतीय कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर इसकी कीमतों में भारी गिरावट आई, जो हाल के रिकॉर्ड हाई से लगभग 40% नीचे आकर लगभग ₹2.99 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गई।

यह बड़ी गिरावट 30 जनवरी को आई थी, जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) ने ब्याज दरों पर अपनी नीति स्थिर रखी और राष्ट्रपति ट्रंप ने केविन वारश को अगले फेड चेयर के तौर पर नॉमिनेट किया। वारश की संभावित 'हॉकिश' (Hawkish) माने जा रहे रुख के कारण डॉलर मजबूत हुआ और कीमती धातुओं में बिकवाली देखी गई।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी जनवरी की मीटिंग में ब्याज दरों को 3.5%–3.75% की रेंज में अपरिवर्तित रखा। हालांकि, वारश की नियुक्ति से मार्केट में एक नई अनिश्चितता आ गई है। कुछ विश्लेषकों का मानना ​​है कि वारश शायद उतने हॉकिश न हों और पॉलिसी में ढील दे सकते हैं, जिससे लंबी अवधि में सिल्वर जैसे एसेट्स को सहारा मिल सकता है।

Geopolitical तनाव और इकोनॉमिक संकेतों का खेल

लंबे समय से, यूक्रेन युद्ध और गाजा संकट जैसे Geopolitical तनावों ने सिल्वर को 'सेफ-हेवन' (Safe-haven) एसेट के तौर पर सपोर्ट दिया है। लेकिन हाल ही में, राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान के साथ तनाव कम करने के बयानों ने सैन्य टकराव के तत्काल डर को कुछ हद तक कम कर दिया है। इस जोखिम में कमी ने उन एसेट्स के लिए बाज़ार को बेहतर बनाया है जहां थोड़ा ज़्यादा रिस्क होता है, जिससे पारंपरिक सेफ-हेवन की मांग में अस्थायी कमी आई है।

इसके साथ ही, ट्रेड रिलेशंस में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अमेरिकी टैरिफ समायोजन के बाद USD-INR रेट में गिरावट आ सकती है।

अमेरिका और भारत के इकोनॉमिक डेटा का मिला-जुला असर

इकोनॉमिक डेटा की बात करें तो, अमेरिका का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर जनवरी 2026 में फिर से मजबूत हुआ। S&P ग्लोबल US मैन्युफैक्चरिंग PMI बढ़कर 52.4 हो गया, जो उत्पादन में तेज़ी का संकेत देता है। हालांकि, इनपुट लागतें और सेलिंग प्राइस बढ़ी हैं। दूसरी ओर, सर्विस सेक्टर में थोड़ी सुस्ती और संभावित छंटनी के संकेत मिल रहे हैं।

अमेरिकी सरकार में संभावित शटडाउन का खतरा भी है, जिससे महत्वपूर्ण नौकरियों के डेटा (Jobs Data) और अन्य आर्थिक रिपोर्ट्स में देरी हो सकती है। भारत की बात करें तो, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अपनी आगामी पॉलिसी मीटिंग में प्रमुख ब्याज दर 5.25% पर स्थिर रख सकता है, क्योंकि महंगाई टारगेट के भीतर है और इकोनॉमिक ग्रोथ मजबूत बनी हुई है।

लंबी अवधि की डिमांड और भविष्य की राह

छोटी-मोटी उठा-पटक के बावजूद, सिल्वर की स्ट्रक्चरल डिमांड, खासकर इंडस्ट्रियल सेक्टर से, इसके लॉन्ग-टर्म वैल्यू को सपोर्ट कर रही है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs), AI और सेमीकंडक्टर्स जैसे क्षेत्रों में बढ़ती मांग 2026 में इंडस्ट्रियल कंजम्पशन को बढ़ाएगी। 2024 में ग्लोबल सिल्वर डिमांड का लगभग 60% इंडस्ट्रियल इस्तेमाल से आया था।

सप्लाई की तरफ भी कुछ रुकावटें हैं, क्योंकि सिल्वर अक्सर अन्य माइनिंग ऑपरेशंस का बाय-प्रोडक्ट (By-product) होता है। सिल्वर ने हाल ही में गोल्ड को आउटपरफॉर्म किया है, जैसा कि गोल्ड-सिल्वर रेशियो (Gold-Silver Ratio) में कमी से पता चलता है। कुछ विश्लेषक 2026 में सिल्वर के लिए $120 प्रति औंस तक के टारगेट दे रहे हैं।

हालांकि हाल की गिरावट ने असर डाला है, लेकिन फंडामेंटल ड्राइवर्स बताते हैं कि सिल्वर में रिकवरी आ सकती है, क्योंकि बाज़ार पॉलिसी और Geopolitical बदलावों को समझ रहा है।

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