इस तेज़ी के पीछे सबसे बड़ा कारण था अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव। राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के संकेतों ने एक क्लासिक 'फ्लाइट टू सेफ्टी' को जन्म दिया। इस स्थिति को कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी ने और हवा दी, जो अक्सर वैश्विक अस्थिरता और महंगाई से जुड़ा होता है। SPDR Gold Shares (GLD), iShares Gold Trust (IAU), और iShares Silver Trust (SLV) जैसे प्रमुख ETFs को इस मांग का फायदा मिला।
हालांकि, बाज़ार के गहरे विश्लेषण से पता चलता है कि स्थिति इतनी सीधी नहीं है। निवेशकों का व्यवहार एक जटिल तस्वीर पेश कर रहा है। अप्रैल में जहां ग्लोबल गोल्ड ETFs में $6.6 अरब का भारी इनफ्लो (Net Inflows) देखा गया, वहीं भारत में Silver ETFs से अप्रैल के दौरान ₹126.72 करोड़ का मामूली आउटफ्लो (Net Outflows) हुआ। यह फरवरी में सिल्वर ETFs से हुए करीब ₹826 करोड़ के आउटफ्लो के बाद हुआ, जो निवेशकों द्वारा प्रॉफिट-टेकिंग (Profit-taking) का संकेत देता है।
स्थिति को और जटिल बनाते हुए, हालिया बाज़ार आंकड़ों के अनुसार, US Dollar Index (DXY) 0.20% चढ़ा और 10-Year Treasury Yield 4.43% पर पहुंच गया। ये बढ़तें आमतौर पर सेफ-हेवन संपत्तियों के लिए अच्छी नहीं मानी जातीं, क्योंकि एक मज़बूत डॉलर और बढ़ती ब्याज दरें ऐसी संपत्तियों पर दबाव डालती हैं। सोने के सेफ-हेवन स्टेटस पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि इसने मार्च में ईरान संघर्ष के शुरुआती दौर में 14.5% की गिरावट दर्ज की थी। सिल्वर की मांग औद्योगिक उपयोग पर भी निर्भर करती है, जो इसे वैश्विक आर्थिक बदलावों के प्रति संवेदनशील बनाती है। बढ़ती ब्याज दरें नॉन-यील्डिंग (Non-yielding) संपत्तियों जैसे सोने को कम आकर्षक बनाती हैं।
कुल मिलाकर, भू-राजनीतिक डर तत्काल खरीद को बढ़ा सकता है, लेकिन आर्थिक कारक और सिल्वर में 2025 में लगभग 148% की बड़ी बढ़ोतरी के बाद हुई प्रॉफिट-टेकिंग हालिया मूल्य वृद्धि की स्थिरता पर सवाल खड़े करती है। निवेशकों को महंगाई के आंकड़े, सेंट्रल बैंक की नीतियां, और डॉलर व ट्रेजरी यील्ड के बीच संबंध पर नज़र रखनी चाहिए।
