MCX पर कीमती धातुओं में 'रैली'
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज ट्रेडिंग सेशन में कीमती धातुओं ने निवेशकों को मालामाल कर दिया। गोल्ड फ्यूचर्स में इंट्रा-डे करीब 3.77% की बड़ी बढ़त दर्ज की गई, जबकि सिल्वर फ्यूचर्स में इससे भी कहीं ज़्यादा, यानी 6.80% की तूफानी तेज़ी देखी गई। ऐतिहासिक रूप से, चांदी की कीमतों में सोने की तुलना में ज़्यादा वोलैटिलिटी (Volatility) यानी उतार-चढ़ाव देखा जाता है, और आज का दिन इस पैटर्न को एक बार फिर साबित करता दिखा, जहाँ चांदी के फ्यूचर्स में सोने के मुकाबले प्रतिशत के लिहाज़ से कहीं ज़्यादा बड़ी उछाल आई। भारतीय कमोडिटी ईटीएफ बाज़ार, खासकर कीमती धातुओं में निवेशक की बढ़ती दिलचस्पी के चलते, लगातार ग्रोथ कर रहा है।
सिल्वर ईटीएफ का दबदबा: 9% से ज़्यादा का उछाल
कीमतों में आई इस ज़बरदस्त तेजी का असर सीधे सिल्वर ईटीएफ (Silver ETF) पर पड़ा, जिसने आज असाधारण दैनिक लाभ दर्ज किए। मिसाल के तौर पर, मिराए एसेट सिल्वर ईटीएफ (Mirae Asset Silver ETF) ने अकेले 9.44% की छलांग लगाई। इसके अलावा, HDFC सिल्वर ईटीएफ (HDFC Silver ETF) 8.68% और टाटा सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Tata Silver Exchange Traded Fund) 7.52% चढ़े। इन फंड्स का एक साल का रिटर्न तो और भी चौंकाने वाला है, जिसने निवेशकों के पैसे को दोगुना से भी ज़्यादा कर दिया है, जो कि 250% से लेकर 278% तक पहुँच रहा है। यह ज़बरदस्त उछाल इस बात की ओर इशारा करता है कि कमोडिटी में तेज़ी आने पर चांदी अक्सर सोने से 1.5 से 2 गुना ज़्यादा प्रतिशत रिटर्न दे सकती है।
गोल्ड ईटीएफ: स्थिर और दमदार रिटर्न
दूसरी ओर, गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) ने सोने की कीमतों की तरह ही एक स्थिर, पर बेहद प्रभावशाली, ऊपरी चाल दिखाई। कोटक गोल्ड ईटीएफ (Kotak Gold ETF) 5.11% बढ़ा, जबकि एक्सिस गोल्ड ईटीएफ (Axis Gold ETF) 4.71% और HDFC गोल्ड ईटीएफ (HDFC Gold ETF) 4.61% की बढ़त के साथ पीछे रहे। हालाँकि दैनिक लाभ चांदी ईटीएफ जितने विस्फोटक नहीं थे, लेकिन एक साल के रिटर्न के मामले में ये भी शानदार रहे, जो करीब 97.69% से 99.83% तक रहे। यानी, पिछले बारह महीनों में निवेशकों का पैसा लगभग दोगुना हो गया। यह स्थिर प्रदर्शन सोने की उस पारंपरिक भूमिका को दर्शाता है, जहाँ इसे महंगाई और करेंसी की गिरती कीमत के खिलाफ एक सुरक्षित निवेश (Store of Value) माना जाता है।
एनालिस्ट की चेतावनी: चांदी में 'वोलैटिलिटी' का खतरा
दैनिक और सालाना रिटर्न भले ही आकर्षक हों, लेकिन बाज़ार विश्लेषकों ने चांदी की इस तेज़ रफ्तार पर चिंता जताई है। UBS जैसे एनालिस्ट का कहना है कि चांदी में लॉन्ग-टर्म (Long-term) निवेश बनाने के लिए 'अभी जल्दबाजी होगी', क्योंकि इसकी कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) अभी जारी रहने की संभावना है। यह स्थिति चांदी की दोहरी भूमिका (सुरक्षित निवेश और औद्योगिक मांग) के कारण है। विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 तक संभावित ब्याज दरों में कटौती, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ और अमेरिकी डॉलर में नरमी के चलते सोने और चांदी दोनों में और तेज़ी आ सकती है। लेकिन, चांदी का 'हाई बीटा' (Higher Beta) मतलब है कि औद्योगिक मांग में कमी आने या आर्थिक माहौल तेज़ी से बदलने पर इसकी कीमतें ज़्यादा तेज़ी से गिर भी सकती हैं। इसलिए, सोने के मुकाबले चांदी में निवेश इस समय ज़्यादा जोखिम और ज़्यादा रिटर्न वाला दांव साबित हो सकता है।