फरवरी में क्यों हुई फंडों से निकासी?
2025 में 148% और 2026 की शुरुआत में 20% की शानदार तेजी के बाद, चांदी की कीमतों में फरवरी के महीने में 20.2% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसी गिरावट के चलते, 28 महीनों के बाद पहली बार Silver ETFs से ₹826 करोड़ की नेट निकासी हुई। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ इंडिया (Amfi) के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में कुल ₹4,628 करोड़ का इनफ्लो आया, लेकिन ₹5,455 करोड़ के रिडेम्पशन (redemption) के चलते नेट आउटफ्लो ₹826.3 करोड़ रहा। यह जनवरी के रिकॉर्ड ₹9,463.40 करोड़ के इनफ्लो के बिल्कुल विपरीत था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मुख्य रूप से उन निवेशकों द्वारा की गई प्रॉफिट-बुकिंग (profit-booking) का नतीजा है जिन्होंने हाल की तेजी का फायदा उठाया था। फरवरी के अंत तक, सिल्वर ईटीएफ का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹91,975 करोड़ पर था।
निवेशकों की दिलचस्पी और मजबूत मांग
इस भारी निकासी के बावजूद, सिल्वर ईटीएफ में निवेशकों की कुल संख्या (folio numbers) बढ़ी है। एक्सिस म्यूचुअल फंड की वंदना त्रिवेदी ने बताया कि जनवरी 2026 से फरवरी 2026 के बीच सिल्वर ईटीएफ इन्वेस्टर फोलियो में 13% की बढ़ोतरी हुई, जो अब 5.41 मिलियन तक पहुंच गए हैं। इसके अलावा, नई स्कीमों का लॉन्च होना भी इस बात का संकेत देता है कि निवेशकों का बेस अभी भी बढ़ रहा है। जानकारों का कहना है कि चांदी में निवेश की मुख्य वजह इसकी औद्योगिक मांग है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs), AI इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टरों में चांदी की मांग लगातार बनी हुई है। साथ ही, सप्लाई की कमी (supply deficits) भी एक बड़ा कारण है, क्योंकि कई सालों से चांदी का उत्पादन खपत को पूरा नहीं कर पा रहा है।
चांदी की वोलेटिलिटी और गोल्ड से तुलना
2026 की शुरुआत में चांदी के ईटीएफ ने गोल्ड ईटीएफ को पीछे छोड़ दिया था, हालांकि फरवरी में गोल्ड ईटीएफ में भी इनफ्लो कम होकर ₹5,255 करोड़ रह गया (जो जनवरी में ₹24,040 करोड़ था)। गोल्ड को जहां 'सेफ-हेवन' (safe-haven) माना जाता है, वहीं चांदी की ज्यादा वोलेटिलिटी (volatility) और औद्योगिक उपयोग इसे 'गोल्ड ऑन स्टेरॉयड' (gold on steroids) बनाते हैं। हालांकि, यह ज्यादा वोलेटिलिटी जोखिम भी बढ़ाती है। इतिहास बताता है कि चांदी की बड़ी रैलियों के बाद अक्सर बड़ी गिरावट आई है। 1980 और 2011 के बाद आई तेजी के बाद चांदी 70% तक गिर चुकी है। फरवरी 2026 की शुरुआत में जनवरी के पीक से लगभग 38% की गिरावट इसी प्रवृत्ति को दर्शाती है। इसके अलावा, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, डॉलर की मजबूती, महंगाई की चिंताएं और भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) जैसे मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर (macroeconomic factors) भी चांदी की कीमतों को प्रभावित करते हैं। 30 जनवरी, 2026 को केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के फेड चेयर नॉमिनेशन की खबर ने भी इंट्रा-सेशन (intra-session) में बड़ी गिरावट ला दी थी।
मुख्य जोखिम और निवेशकों का व्यवहार
2026 के फरवरी में हुई यह आउटफ्लो एक अस्थायी संकेत हो सकता है, लेकिन यह चांदी से जुड़े जोखिमों को उजागर करता है। सोने की तुलना में चांदी की कीमतें ज्यादा वोलेटाइल होती हैं, यानी इनमें बड़े प्रतिशत में उतार-चढ़ाव देखा जाता है। अगर ग्लोबल इकोनॉमी में बड़ी मंदी आती है या टैरिफ बढ़ते हैं, तो चांदी की मांग कम हो सकती है, जिससे कीमतों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। 2025 में 148% तक की तेजी के बाद, कई निवेशकों ने सट्टा (speculative) पोजीशन ली होंगी, जो अब वापस ली जा सकती हैं। फरवरी और जनवरी 2026 में देखी गई 20-27% की बड़ी गिरावटें इसी ओर इशारा करती हैं, जिससे फंडों से और निकासी हो सकती है। एक्सपर्ट्स की मानें तो निवेशक अक्सर हाल के परफ़ॉर्मर की तरफ भागते हैं और बड़ी गिरावट में मुनाफा निकाल लेते हैं, जिससे कीमतें और नीचे जा सकती हैं। इसके अलावा, चांदी की कीमत सोने की चाल से भी काफी हद तक प्रभावित होती है, इसलिए सोने में बड़ी गिरावट चांदी को भी नीचे खींच सकती है।
आगे का अनुमान: सावधानी के साथ उम्मीद
भविष्य को देखते हुए, बाजार की भावना (market sentiment) सावधानी के साथ उम्मीद भरी है। एनालिस्ट्स का मानना है कि लगातार औद्योगिक मांग और सप्लाई की कमी के चलते चांदी की कीमतों में और बढ़ोतरी जारी रह सकती है। 2026 के लिए अनुमान अलग-अलग हैं, लेकिन कई बड़े ब्रोकरेज हाउस बड़ी तेजी की उम्मीद कर रहे हैं। जे.पी. मॉर्गन (J.P. Morgan) ने औसत कीमत $81 प्रति औंस रहने का अनुमान लगाया है, हालांकि उन्होंने $50 तक की गिरावट का भी जोखिम बताया है। वहीं, अन्य अनुमान $56-$65 के बीच हैं, और कुछ का मानना है कि यह $100 या उससे भी ऊपर जा सकती है। वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने 2026 के लिए $41 का औसत अनुमान दिया है, जबकि ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स (Trading Economics) का अनुमान है कि Q1 2026 के अंत तक यह $83.94 और 12 महीनों में $100.09 तक पहुंच सकती है। कुल मिलाकर, चांदी में लगातार वोलेटिलिटी रहने की उम्मीद है, लेकिन फंडामेंटल मजबूत बने हुए हैं। इसलिए, निवेशकों को लंबी अवधि का नजरिया रखना चाहिए और शॉर्ट-टर्म प्राइस मूवमेंट पर ध्यान देने के बजाय स्ट्रैटेजिक एसेट एलोकेशन (strategic asset allocation) का पालन करना चाहिए।
