बाजार में लौटी बिकवाली, Silver ETFs पर गिरी गाज
5 फरवरी 2026 को कीमती धातुओं के बाजार में एक बार फिर बिकवाली का दबाव लौट आया, जिससे निवेशक सहम गए। खासकर Silver ETFs में तेज गिरावट दर्ज की गई, जहाँ शुरुआती कारोबार में कुछ फंड्स 10% से लेकर 15% तक गिर गए। कुछ मामलों में तो यह गिरावट 21% तक पहुंच गई, जो कि Gold ETFs के प्रदर्शन से कहीं ज्यादा खराब थी। Gold ETFs में जहाँ 5% से 5.5% की गिरावट आई, वहीं MCX Silver futures 8.35% टूटकर करीब ₹2,46,397 पर आ गए। वहीं, MCX Gold futures 0.68% गिरकर लगभग ₹1,52,000 पर स्थिर रहे। यह बड़ा अंतर Silver की बढ़ी हुई अस्थिरता को साफ दिखाता है।
Silver की दोहरी मार: इंडस्ट्री डिमांड का असर
Silver की यह अत्यधिक अस्थिरता इसके दोहरे स्वभाव के कारण है - यह एक औद्योगिक कमोडिटी (commodity) भी है और निवेश संपत्ति (investment asset) भी। सोने के विपरीत, जो मुख्य रूप से सुरक्षित निवेश (safe-haven) माना जाता है, Silver की कीमत औद्योगिक मांग से बहुत प्रभावित होती है, जो इसकी कुल खपत का लगभग 50% हिस्सा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी और ऑटोमोबाइल (खासकर इलेक्ट्रिक व्हीकल) जैसे सेक्टर्स में इसकी मांग रहती है। ऐसे में, जब भी आर्थिक अनिश्चितता या औद्योगिक उत्पादन में बड़े बदलाव होते हैं, Silver की कीमतों में Gold की तुलना में कहीं ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। यह मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों के प्रति संवेदनशीलता, खासकर सट्टेबाजी वाले निवेश प्रवाह (speculative investment flows) के साथ मिलकर, बड़ी मूल्य में उतार-चढ़ाव पैदा करती है।
गिरावट के पीछे के कारण
इस भारी बिकवाली की कई वजहें हैं। Augmont Bullion Daily Report के मुताबिक, निवेशकों का सेंटिमेंट (sentiment) हाल की मूल्य सुधारों के बाद चीन के गोल्ड ETFs से लगभग $1 अरब के रिकॉर्ड दैनिक आउटफ्लो (outflows) से बुरी तरह प्रभावित हुआ। इसके अलावा, भू-राजनीतिक घटनाओं, जैसे कि आगामी अमेरिका-ईरान वार्ता की खबरों ने भी सुरक्षित निवेश की मांग को कम किया।
बाजार सहभागियों ने इन सबके साथ एक्सचेंजों द्वारा लगाए गए अतिरिक्त मार्जिन (margin) की ज़रूरतों पर भी प्रतिक्रिया दी। 5 फरवरी से MCX पर Silver futures पर 4.5% और Gold futures पर 1% का अतिरिक्त मार्जिन लागू हो गया, जिसने बिकवाली के दबाव को और बढ़ा दिया। Enrich Money के CEO, पौनमदी आर (Ponmudi R) ने बताया कि MCX Silver futures अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर ₹4,20,000 से गिरकर ₹2,50,000–₹2,60,000 के दायरे में कारोबार कर रहे हैं, जो फिलहाल कमजोरी का संकेत देता है। हालांकि, उन्होंने ₹2,35,000–₹2,50,000 के सपोर्ट ज़ोन (support zone) के आसपास अच्छी खरीदारी का संकेत दिया है।
तुलनात्मक प्रदर्शन और आगे क्या?
पिछले साल, यानी 2025 में, Silver ETFs ने शानदार 160% से अधिक का रिटर्न दिया था, जो इस साल फरवरी की शुरुआत में देखे गए भारी उलटफेर के बिलकुल विपरीत है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही अभी करेक्शन (correction) का दौर चल रहा हो, Gold के लिए लंबी अवधि का तेजी वाला ढांचा (bullish structure) बरकरार है। ₹1,45,000–₹1,48,000 के स्तर पर मजबूत सपोर्ट है, और ₹1,55,000–₹1,60,000 के ऊपर की लगातार बढ़त Gold को फिर से ऊपरी गति पकड़ने में मदद कर सकती है।
Silver की बात करें तो, ₹2,35,000–₹2,50,000 के सपोर्ट बैंड (support band) पर लगातार बने रहने से यह ₹3,00,000–₹3,25,000 की ओर वापसी कर सकता है। हालांकि, वैश्विक कारकों और निवेशकों के प्रवाह (investor flows) से प्रेरित लगातार अस्थिरता को देखते हुए, विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
