सोने-चांदी के फ्यूचर्स में तेजी, पर ETF में अलग कहानी
27 फरवरी 2026 को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी के फ्यूचर्स (Futures) में तेजी दर्ज की गई। MCX पर अप्रैल डिलीवरी वाले सोने का भाव 0.29% बढ़कर ₹1,60,172 प्रति 10 ग्राम रहा, जबकि मई डिलीवरी वाली चांदी 2.44% उछलकर ₹2,74,486 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। COMEX पर भी गोल्ड फ्यूचर्स 0.19% और सिल्वर फ्यूचर्स 3.16% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जिसमें वॉल्यूम (Volume) भी अच्छा था। शुरुआत में, इस तेजी का असर कई गोल्ड और सिल्वर ETFs पर भी देखा गया।
लेकिन, हालिया ETF परफॉर्मेंस में एक बड़ा और चिंताजनक अंतर सामने आया है, खासकर फरवरी 2026 के दौरान। जहाँ गोल्ड ETF ने औसतन 3% का रिटर्न दिया है, वहीं सिल्वर ETF एक महीने में ही करीब 15.66% तक लुढ़क गए। यह बड़ा फासला दिखाता है कि क्यों सोने और चांदी को अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है, भले ही फ्यूचर्स मार्केट में दोनों एक साथ बढ़े हों। फ्यूचर्स की यह दैनिक बढ़त, सिल्वर ETF के हालिया मुश्किल दौर को छिपा रही है।
भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितताएं हावी
इस समय कीमती धातुओं में आई इस मजबूती के पीछे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और मैक्रोइकॉनॉमिक अनिश्चितताएं (Macroeconomic Uncertainties) का बड़ा हाथ है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच, सोने को एक सुरक्षित निवेश (Safe-haven Asset) के तौर पर और मजबूत कर रहे हैं। साथ ही, अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी और टैरिफ (Tariff) को लेकर बनी अनिश्चितता, जिसमें हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने पिछली ड्यूटीज को चुनौती दी है, बाजार में और ज्यादा वोलैटिलिटी (Volatility) ला रही है। बीते साल से US डॉलर इंडेक्स (DXY) में कमजोरी भी डॉलर-डिनॉमिनेटेड कमोडिटीज (Commodities) जैसे सोना और चांदी के लिए फायदेमंद साबित हो रही है।
सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और चांदी की दोहरी भूमिका
दुनियाभर के सेंट्रल बैंक (Central Banks) लगातार रणनीतिक रूप से सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं, और अमेरिकी डॉलर से इतर अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई (Diversify) कर रहे हैं। यह सोने की मांग को एक मजबूत आधार दे रहा है। वहीं, चांदी सिर्फ सेफ-हेवन के तौर पर ही नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल (Industrial) इस्तेमाल, खासकर ग्रीन एनर्जी सेक्टर जैसे सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) में अपनी अहम भूमिका के चलते भी फायदेमंद है। इसी दोहरी वजह से चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा वोलैटिलिटी देखी जाती है।
साल-दर-साल बड़ी तेजी, पर अब दिख रहा है अंतर
27 फरवरी 2026 तक, चांदी की कीमतों में पिछले साल की तुलना में काफी वृद्धि देखी गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल-दर-साल (YoY) यह 189.42% बढ़ी और जनवरी 2026 में इसने $121.64 का ऑल-टाइम हाई (All-time High) छुआ था। ऐतिहासिक रूप से देखें तो, फरवरी 2025 में चांदी करीब $32.23 पर थी, जबकि सोना $2,814.60 के आसपास था। यह दिखाता है कि पिछले एक साल में दोनों कीमती धातुओं में कितनी बड़ी तेजी आई है।
विश्लेषकों की राय और जोखिम
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए सोना 2026 में $6,200 प्रति औंस तक जा सकता है। उनका अनुमान है कि सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी और रिजर्व डाइवर्सिफिकेशन सोने को सपोर्ट करते रहेंगे। लेकिन, सिल्वर ETF का अलग प्रदर्शन बताता है कि चांदी में सट्टा (Speculative) की चाहत कम हो सकती है।
सिल्वर ETF में गिरावट का बड़ा कारण
फरवरी 2026 में सिल्वर ETF में आई लगभग 15.66% की तेज गिरावट, गोल्ड ETF की 3% की मामूली बढ़त के मुकाबले, चांदी निवेशकों के लिए एक बड़ा जोखिम है। यह बड़ा अंतर संकेत देता है कि चांदी की तेज चढ़ाई शायद उसकी अपनी वोलैटिलिटी और सट्टा-संवेदनशील प्रकृति के कारण थम रही है, जो सोने की तुलना में छोटे मार्केट कैप (Market Cap) के कारण और बढ़ जाती है। कुछ मार्केट एनालिस्ट (Analyst) कीमती धातुओं की हालिया तेज चाल को 'बबल' या 'मेनिया' (Mania) बता रहे हैं और वर्तमान वैल्यूएशन (Valuation) की स्थिरता पर सवाल उठा रहे हैं।
फेडरल रिजर्व, कमोडिटी आउटलुक और इकोनॉमिक स्लोडाउन
हालांकि भू-राजनीतिक तनाव फिलहाल सोने के पक्ष में हैं, लेकिन अगर संघर्ष कम होते हैं या फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) का रुख कम सख्त होता है, तो सेफ-हेवन डिमांड घट सकती है। फेडरल रिजर्व ने फरवरी 2026 में फेडरल फंड्स रेट (Federal Funds Rate) को 3-3/4% की रेंज में बरकरार रखा है, लेकिन आने वाले इन्फ्लेशन (Inflation) और रोजगार के आंकड़े भविष्य की नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। यदि इन्फ्लेशन लगातार बना रहता है, तो ऊंची ब्याज दरें, सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स (Non-yielding Assets) के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। इसके अलावा, वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने 2026 में कुल कमोडिटी कीमतों में 7% की गिरावट का अनुमान लगाया है, जो ब्रॉड कमोडिटी मार्केट के लिए एक चुनौतीपूर्ण माहौल का संकेत देता है। चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड पर भारी निर्भरता उसे ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन (Economic Slowdown) के प्रति और अधिक संवेदनशील बनाती है।
आगे का रास्ता: सतर्कता जरूरी
2026 के लिए कीमती धातुओं के कंसेंसस प्राइस फोरकास्ट (Consensus Price Forecast) में लगातार ऊपर की ओर संशोधन हो रहा है, जिसका मुख्य कारण अनिश्चित भू-राजनीतिक और मैक्रोइकॉनॉमिक हालात हैं, जो सेफ-हेवन एसेट्स को सहारा दे रहे हैं। हालांकि, फरवरी 2026 में गोल्ड और सिल्वर ETF के प्रदर्शन में जो जमीन-आसमान का अंतर दिखा है - गोल्ड का बढ़ना और सिल्वर का तेजी से गिरना - वह निवेशकों के लिए गहन जांच का विषय है। जबकि ग्रीन एनर्जी सेक्टर से चांदी की स्ट्रक्चरल डिमांड (Structural Demand) और सेंट्रल बैंकों की लगातार गोल्ड खरीदारी से इसे आधार मिलने की उम्मीद है, वहीं वर्तमान कीमतों की स्थिरता भू-राजनीतिक जोखिमों और व्यापक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। UBS के विश्लेषकों का अनुमान है कि सोना $6,200/oz तक जा सकता है, लेकिन सिल्वर ETF में हालिया तेज गिरावट एक चेतावनी संकेत है, जो चांदी की बढ़ती सट्टा संवेदनशीलता और कीमती धातुओं के बाजार को आकार देने वाली जटिल, अक्सर भिन्न, गतिशीलता को रेखांकित करता है।