Silver ETFs: चांदी में **98%** की उछाल, फिर भी निवेशकों को सिर्फ **18%** रिटर्न क्यों?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Silver ETFs: चांदी में **98%** की उछाल, फिर भी निवेशकों को सिर्फ **18%** रिटर्न क्यों?

चांदी की कीमतों में साल भर में **98%** की ऐतिहासिक तेजी आई है, लेकिन Silver ETF निवेशकों का औसत रिटर्न केवल **18%** रहा। जनवरी 2026 में रिकॉर्ड निवेश के कारण कई लोगों ने पीक लेवल पर एंट्री की, जिससे अब आधे से ज्यादा निवेश घाटे में है।

चांदी की कीमतों में 12 महीनों में 98% का जबरदस्त उछाल आया है, लेकिन Silver ETFs के निवेशकों के लिए तस्वीर काफी अलग रही। यह फर्क इस बात का सबूत है कि निवेश के पूरे सफर में एसेट की ग्रोथ से ज्यादा महत्वपूर्ण 'एंट्री टाइमिंग' होती है।

रैली के पीछे छिपी कड़वी सच्चाई

इस परफॉरमेंस गैप का मुख्य कारण वह समय है जब पैसा इन फंड्स में आया। DSP Mutual Fund Netra की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 में निवेशकों ने Silver ETFs में रिकॉर्ड ₹11,761 करोड़ का निवेश किया। दुर्भाग्य से, यही वह समय था जब चांदी की कीमतें अपने उच्चतम स्तर (Peak) पर थीं। जब बड़ी पूंजी बाजार में तेजी के बीच में आती है, तो कुल निवेश का औसत रिटर्न एसेट की कुल ग्रोथ से काफी कम हो जाता है।

पूंजी पर पड़ा बड़ा असर

बाजार में आई गिरावट का असर तुरंत दिखा। जुलाई 2026 के अंत तक, पिछले एक साल में Silver ETFs में लगा 56% कैपिटल घाटे में चल रहा था। कमोडिटी की कीमतें साल भर पहले के मुकाबले भले ही ऊंची रहीं, लेकिन गलत समय पर खरीदारी के कारण अधिकांश पोर्टफोलियो उस बढ़त का फायदा नहीं उठा सके।

यह ट्रेंड निवेशकों के लिए 'FOMO' (छूट जाने का डर) से बचने की एक बड़ी चेतावनी है। जब निवेशक केवल ऐतिहासिक तेजी देखकर निवेश करते हैं, तो वे अक्सर 'टॉप' पर खरीदारी कर लेते हैं, जिससे रिस्क बढ़ जाता है। फाइनेंशियल डेटा यही सिखाता है कि पिछले रिटर्न के आधार पर भविष्य तय करना खतरनाक हो सकता है। अब सवाल यह है कि क्या चांदी की कीमतें फिर से संभलेंगी या करेक्शन का दौर लंबा चलेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.