सोने की रिकॉर्ड कीमतों के कारण इस फेस्टिव सीजन में भारतीय ग्राहक चांदी की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। मांग को पूरा करने के लिए रिटेलर्स अपनी इन्वेंट्री बदल रहे हैं, जिसे सरकारी नीतियों के बदलाव के बाद अगस्त में चांदी के इंपोर्ट में आई **127%** की भारी तेजी का सहारा मिला है।
ग्राहकों की पहली पसंद बनी चांदी
सोने की बढ़ती कीमतों ने आम भारतीय परिवारों के बजट पर असर डाला है। जहां 10 ग्राम सोने की कीमत ₹1.5 लाख के पार निकल चुकी है, वहीं मिडिल-क्लास खरीदार अब उपहारों, मूर्तियों और गहनों के लिए चांदी को तरजीह दे रहे हैं, ताकि दिवाली जैसे त्योहारों पर उनका बजट न बिगड़े।
रिटेलर्स की रणनीति में बदलाव
ज्वैलरी रिटेलर्स अब अपनी इन्वेंट्री को री-स्ट्रक्चर कर रहे हैं। हालांकि सोना और डायमंड बिजनेस का मुख्य हिस्सा बने हुए हैं, लेकिन सेल्स वॉल्यूम बनाए रखने के लिए अब चांदी के गहनों और आर्टिकल्स पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। रिटेलर्स के लिए चांदी अब महज एक साइड-प्रोडक्ट नहीं, बल्कि सालाना रेवेन्यू का एक अहम हिस्सा बन गई है।
इंपोर्ट में आया बड़ा उछाल
सरकार द्वारा जुलाई में चांदी के इंपोर्ट पर नियमों में ढील देने के बाद सप्लाई चेन काफी मजबूत हुई है। वाणिज्य मंत्रालय (Commerce Ministry) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में चांदी का इंपोर्ट $1 बिलियन के पार पहुंच गया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 127% की जबरदस्त बढ़ोतरी है। इससे त्योहारों के दौरान बाजार में चांदी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है।
क्या है इन्वेस्टर्स के लिए रिस्क?
India Bullion and Jewellers Association (IBJA) को चांदी की खरीद में 18% तक की ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि, कमोडिटी मार्केट की वोलेटिलिटी (Volatility) एक बड़ा रिस्क है। यदि भविष्य में सोने की कीमतें स्थिर होती हैं या घटती हैं, तो ग्राहकों की पसंद फिर से बदल सकती है। फिलहाल, रिटेलर्स के लिए चुनौती यह है कि वे चांदी की बढ़ती वॉल्यूम के बीच अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे मैनेज करते हैं।
