हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में **7** तेल टैंकरों के क्षतिग्रस्त होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। आग और समुद्री बारूदी सुरंगों के कारण हुई इस घटना से कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए महंगाई का खतरा बढ़ गया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में रातों-रात हुई सिलसिलेवार स्ट्राइक में 7 तेल टैंकर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 4 जहाजों में ईंधन ट्रांसफर के दौरान आग लग गई, जबकि 3 अन्य टैंकर समुद्री बारूदी सुरंगों (naval mines) की चपेट में आकर ठप हो गए। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण 'चोकपॉइंट' माना जाता है, और इस घटना ने वैश्विक शिपिंग और कमोडिटी बाजार में गहरी अनिश्चितता पैदा कर दी है।
निवेशकों के लिए क्यों है चिंता का विषय?
दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से तेल आयात करता है। किसी भी तरह का तनाव सीधे तौर पर कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) में अस्थिरता लाता है। अब निवेशकों को इस बात का डर है कि बढ़ती ऊर्जा लागत कई उद्योगों के मार्जिन पर बुरा असर डालेगी। इसके अलावा, समुद्री सुरक्षा जोखिम बढ़ने से 'वॉर रिस्क इंश्योरेंस' (War Risk Insurance) प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी तय है, जिसका असर शिपिंग कंपनियों के खर्च पर पड़ेगा।
भारतीय बाजार पर असर
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की सैन्य एस्कॉर्ट संबंधी चेतावनी ने भू-राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना दिया है। यमन और सीरिया में जारी तनाव के बीच, यह घटना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा चिंता का विषय है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इसका सीधा असर भारत के इंपोर्ट बिल पर पड़ेगा, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
विशेष रूप से एविएशन, पेंट्स और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के शेयरों पर नज़र रखना ज़रूरी है, क्योंकि ये फ्यूल की कीमतों के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। फिलहाल, बाजार की नज़र इस बात पर है कि क्या यह घटना टैंकर ट्रैफिक को लंबे समय के लिए बाधित करेगी या स्थिति नियंत्रण में रहती है।
