आज भारतीय शेयर बाज़ार की शुरुआत कमजोरी के साथ होने की आशंका है। GIFT Nifty में करीब **100** अंकों की गिरावट का संकेत है। मध्य-पूर्व के तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें **$96** प्रति बैरल के करीब पहुंचने से निवेशकों की घबराहट बढ़ गई है। यह घरेलू इक्विटी पर दबाव और बढ़ा रहा है, जो पहले से ही तीन दिन की गिरावट झेल चुके हैं।
Detailed Coverage
बाज़ार में गिरावट का अनुमान
इस गुरुवार को भारतीय शेयर बाज़ारों के लिए एक मुश्किल कारोबारी सत्र रहने की उम्मीद है। GIFT Nifty, जो अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में Nifty 50 इंडेक्स के प्रदर्शन पर नज़र रखता है, इसमें लगभग 100 अंकों की गिरावट का संकेत दे रहा है। यह रुझान बताता है कि सेंसेक्स और Nifty 50 जैसे घरेलू बेंचमार्क शुरुआत में संघर्ष कर सकते हैं।
बढ़ती क्रूड ऑयल कीमतों का असर
फिलहाल निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता वैश्विक ऊर्जा लागत में आई तेज़ी है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2% बढ़कर $96 प्रति बैरल के करीब पहुँच गया है, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड $88.27 पर पहुँच गया है। कीमतों में यह बढ़ोतरी मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण है, खासकर ईरान पर अमेरिकी हमलों और लाल सागर में जहाजों पर हुए हमलों की रिपोर्टों के चलते। चूंकि भारत अपनी तेल ज़रूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें दोधारी तलवार की तरह काम करती हैं: ये घरेलू महंगाई को बढ़ा सकती हैं और रुपये पर दबाव डाल सकती हैं, जिससे अंततः कई भारतीय कंपनियों, विशेष रूप से तेल मार्केटिंग, पेंट और एयरलाइन सेक्टर में लाभ मार्जिन प्रभावित होता है।
हालिया बाज़ार के रुझान
घरेलू निवेशक एक चुनौतीपूर्ण हफ़्ते का सामना कर रहे हैं। बुधवार को लगातार तीसरे सत्र में भारतीय शेयरों में गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 715 अंक गिरकर 76,755 पर बंद हुआ, और Nifty 50 191 अंक गिरकर 23,996 पर बंद हुआ। गिरावट के पीछे कई कारण हैं, जिनमें ऊर्जा की बढ़ती लागत, कमजोर रुपया, और हेवीवेट शेयरों में हालिया तेज़ी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफ़ावसूली (profit booking) का चुनाव शामिल है। इसके अलावा, संस्थागत निवेशकों (institutional investors) की बिकवाली भी अस्थिरता बढ़ा रही है। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹819 करोड़ के भारतीय शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी ₹418 करोड़ के शेयर बेचे।
एशियाई बाज़ारों में भिन्नता
दिलचस्प बात यह है कि भारतीय बाज़ार दबाव में हैं, वहीं अन्य एशियाई बाज़ार अलग रुझान दिखा रहे हैं। जापान के निक्केई और दक्षिण कोरिया के कोस्पी जैसे एशियाई सूचकांक आज लाभ दर्ज कर रहे हैं। यह तेज़ी अमेरिका की बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा मजबूत पूंजीगत व्यय (capital spending) की घोषणाओं के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर की मांग को लेकर आशावाद से प्रेरित है। यह एक स्पष्ट विभाजन को उजागर करता है जहां वैश्विक AI-संबंधित भावना कुछ बाज़ारों की मदद कर रही है, जबकि भारत जैसे उभरते बाज़ार वर्तमान में अस्थिर कमोडिटी कीमतों से जुड़े जोखिमों पर अधिक केंद्रित हैं।
आगे, निवेशक मध्य-पूर्व के तनावों से संबंधित किसी भी और विकास पर नज़र रखेंगे, क्योंकि ये सीधे तौर पर तेल की कीमतों को प्रभावित करते हैं। इसके अतिरिक्त, आने वाले सत्रों में FIIs और DIIs के कारोबारी व्यवहार यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होंगे कि वर्तमान बिकवाली का रुझान जारी रहता है या घरेलू खरीद समर्थन सूचकांकों को स्थिर करने में मदद कर सकता है।
