Sebi का बड़ा कदम, पर RBI की चेतावनी! Banks और Insurers कमोडिटी मार्केट में आएंगे?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Sebi का बड़ा कदम, पर RBI की चेतावनी! Banks और Insurers कमोडिटी मार्केट में आएंगे?
Overview

भारतीय रेगुलेटर SEBI, देश के कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट में बैंकों (Banks) और बीमा कंपनियों (Insurance Companies) को शामिल करने की वकालत कर रहा है, लेकिन इस दिशा में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और IRDAI जैसी संस्थाओं ने सावधानी बरतने की सलाह दी है।

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बाज़ारों को मजबूत करने की SEBI की कोशिशें

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की ओर से कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट में संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) की भागीदारी बढ़ाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। SEBI के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने बताया कि RBI और भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) के साथ बातचीत चल रही है। इसका मुख्य उद्देश्य बाजार में लिक्विडिटी (Liquidity) बढ़ाना और कीमतों की बेहतर खोज (Price Discovery) करना है, ताकि भारत सिर्फ वैश्विक कीमतों को मानने वाले देश से आगे बढ़ सके।

RBI और IRDAI की चिंताएं

हालांकि, SEBI जहां बैंकों और बीमा कंपनियों को मार्केट में लाने को लेकर उत्साहित है, वहीं RBI और IRDAI ने अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। पांडे ने माना कि इन रेगुलेटर्स के पास 'वैलिड रीज़न्स' हैं। उन्होंने बताया कि मौजूदा बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट (Banking Regulation Act) बैंकों को सीधे ऐसे निवेश की अनुमति नहीं देता, जिसके लिए कानूनी बदलाव की आवश्यकता होगी। दूसरी ओर, IRDAI का मानना है कि लॉन्ग-टर्म इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स (Long-term Insurance Products) अक्सर कमोडिटी डेरिवेटिव्स के शॉर्ट-टर्म नेचर से मेल नहीं खाते।

GST रिफॉर्म्स से ट्रेडिंग होगी आसान

कमोडिटी ट्रेडिंग से जुड़े ऑपरेशनल और टैक्स संबंधी मुद्दों को सुलझाने के लिए SEBI गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) में भी सुधार का प्रस्ताव रख रहा है। एक मुख्य प्रस्ताव है कि मौजूदा स्टेट GST (State GST) की जगह इंटीग्रेटेड GST (IGST) का इस्तेमाल हो। इससे विभिन्न राज्यों के वेयरहाउस (Warehouses) से होने वाली फिजिकल डिलीवरी (Physical Delivery) की प्रक्रिया सरल हो जाएगी, जिसे फिलहाल 'कठिन' माना जाता है। SEBI GST काउंसिल के साथ मिलकर कमोडिटी डेरिवेटिव्स के लिए टैक्स रेट्स को स्पष्ट करने पर काम कर रहा है।

AI के जोखिम और CKYC 2.0

SEBI आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े जोखिमों को लेकर भी सक्रिय है। चेयरमैन पांडे ने माना कि AI मार्केट सिस्टम में कमज़ोरियों को तेज़ी से ढूंढ सकता है। SEBI जल्द ही इंटरमीडियरीज़ (Intermediaries) को AI से जुड़े जोखिमों और इनसे निपटने के तरीकों पर सलाह देगा। साथ ही, ग्राहक पहचान को आसान बनाने के लिए, SEBI CKYC 2.0 (कस्टोडियल नो योर कस्टमर) सिस्टम को विकसित करने में मदद कर रहा है, जो सभी वित्तीय सेवाओं के लिए एक यूनिफाइड KYC सिस्टम होगा।

बाज़ार की स्थिति और आगे की राह

भारत का कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट, जिसमें क्रूड ऑयल (Crude Oil), गोल्ड (Gold) और सिल्वर (Silver) जैसे उत्पाद शामिल हैं, काफी बड़ा है, लेकिन इसमें लिक्विडिटी (Liquidity) कम है और प्रवेश में बाधाएं हैं। SEBI के ये प्रयास वैश्विक रुझानों के अनुरूप हैं, जहां डेरिवेटिव्स में संस्थागत भागीदारी बढ़ रही है। हालांकि, RBI और IRDAI जैसी संस्थाओं की चिंताओं का समाधान और कानूनी अड़चनों को दूर करना बैंकों और बीमा कंपनियों की एंट्री के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.