तेल सेक्टर को प्रभावित करने वाले गंभीर सप्लाई डिसरप्शन (Supply Disruptions) के चलते Saudi Aramco के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि कंपनियां अब जियोपॉलिटिकल रिस्क (Geopolitical Risk) के लिए भारी प्रीमियम वसूल रही हैं। उनका मकसद सीमित सप्लाई से ज्यादा से ज्यादा रेवेन्यू (Revenue) कमाना है, ताकि खरीदार मांग कम न करें।
युद्ध से प्रीमियम में रिकॉर्ड उछाल
इस रिकॉर्ड प्रीमियम का मतलब है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और हॉरमुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने के चलते सप्लाई पर काफी खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, यह $19.50 का प्रीमियम कुछ ट्रेडर्स (Traders) और रिफाइनर्स (Refiners) की उम्मीदों से कम है, जिन्होंने $40 प्रति बैरल तक की उम्मीद जताई थी। इससे पता चलता है कि Aramco बाजार को अचानक बड़ा झटका देने से बच रही है। इस तनाव ने पहले ही ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में 50% से ज्यादा का उछाल ला दिया है। अनुमान है कि सप्लाई में लगातार रुकावट के कारण 2026 की दूसरी तिमाही तक ब्रेंट $107 प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। दुबई और ओमान जैसे रीजनल बेंचमार्क (Regional Benchmarks) भी असामान्य वोलेटिलिटी (Volatility) दिखा रहे हैं, और अमेरिका में गैसोलीन (Gasoline) की कीमतें भी बढ़ गई हैं।
शिपमेंट्स रीरूट, खरीदारों की चिंता बढ़ी
इन सप्लाई दिक्कतों से निपटने के लिए Saudi Aramco कुछ शिपमेंट्स (Shipments) को रीरूट (Reroute) भी कर रही है। खरीदारों के लिए अब ऑयल की मांग करना ज्यादा कॉम्प्लेक्स (Complex) हो गया है। उन्हें पारंपरिक रास तानूरा (Ras Tanura) की बजाय लाल सागर (Red Sea) के यानबू (Yanbu) जैसे बंदरगाहों पर तेल पहुंचाने की शर्तों का सामना करना पड़ रहा है। Saudi Aramco की लाल सागर तक जाने वाली पाइपलाइन अपनी अधिकतम 7 मिलियन बैरल प्रति दिन की क्षमता पर चल रही है, जिससे करीब 5 मिलियन बैरल रोजाना एक्सपोर्ट हो रहा है, जो युद्ध से पहले की मात्रा का लगभग 70% है। एशिया की रिफाइनरीज कीमतों में लगातार आ रही उठापटक को देखते हुए ग्लोबल बेंचमार्क जैसे ब्रेंट की ओर शिफ्ट होने पर विचार कर रही हैं।
डिमांड में गिरावट का खतरा
हालांकि, हॉरमुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण कीमतें तुरंत बढ़ी हैं, लेकिन इन ऊंचे प्रीमियम की स्थिरता अनिश्चित है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने 2026 के लिए ग्लोबल ऑयल डिमांड ग्रोथ (Demand Growth) के अनुमान को घटाकर 640,000 बैरल प्रति दिन कर दिया है। इसका मुख्य कारण इकोनॉमिक अनिश्चितता (Economic Uncertainty) और तेल की बढ़ी हुई कीमतें हैं। अगर कीमतें $180 प्रति बैरल या उससे ज्यादा हो जाती हैं, जैसा कि सऊदी अधिकारियों ने मॉडल किया है, तो डिमांड में भारी गिरावट का बड़ा खतरा है। इससे लोग लंबे समय के लिए तेल का इस्तेमाल कम कर देंगे और ग्लोबल मंदी (Recession) आ सकती है। ऐसे हालात में रेवेन्यू में कमी आएगी और बाजार में अस्थिरता (Instability) बढ़ेगी, जिससे Saudi Arabia भी बचना चाहता है।
बाजार का आउटलुक
हॉरमुज़ जलडमरूमध्य का बंद होना, जो अब दूसरे महीने में है, 1970 के दशक के बाद ऊर्जा सप्लाई का सबसे बड़ा डिसरप्शन माना जा रहा है। यह ब्रेंट क्रूड की कीमतों को $126 प्रति बैरल तक पहुंचा सकता है। Rabobank का अनुमान है कि यह जलडमरूमध्य अप्रैल तक बंद रह सकता है, और सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं, जिससे 2026 तक कीमतें ऊंची बनी रहेंगी। EIA का अनुमान है कि ब्रेंट की कीमतें अगले दो महीनों तक $95 प्रति बैरल से ऊपर रहेंगी, जिसके बाद वे गिर सकती हैं, लेकिन यह पूरी तरह से युद्ध की अवधि पर निर्भर करेगा। ऐतिहासिक रूप से, तेल की कीमतों ने जियोपॉलिटिकल घटनाओं पर तेजी से प्रतिक्रिया दिखाई है, जो बाजार की इन जैसे डिसरप्शन के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।