सऊदी अरब से भारत को कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई जुलाई में बढ़कर 4.64 लाख बैरल प्रतिदिन होने का अनुमान है, जिससे उसकी हिस्सेदारी 10% तक पहुंच जाएगी। हालाँकि, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण भारत का कुल तेल आयात इस महीने घट सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव का असर
इस महीने सऊदी अरब एक बार फिर भारत के कच्चे तेल (Crude Oil) आयात बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाता दिख रहा है। शुरुआती टैंकर आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में सऊदी अरब से लगभग 4.64 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) तेल आने का अनुमान है। यह भारत के कुल तेल आयात का 10% हिस्सा होगा, जो मई और जून में घटकर औसतन 7% रह गया था।
वर्तमान में भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनावों के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल का प्रवाह प्रभावित हो रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी के कारण इराक, कुवैत और कतर जैसे प्रमुख मध्य पूर्वी देशों से होने वाली तेल की सप्लाई में रुकावटें आ रही हैं। इन देशों के लिए जहाजों से माल भेजने में लॉजिस्टिकल दिक्कतें आने के कारण, सऊदी अरब भारतीय रिफाइनरों के लिए आपूर्ति के इस अंतर को भरने में मदद कर रहा है।
भारत के आयात में बदलाव
आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में भारत का कुल कच्चे तेल का आयात घटकर 45.5 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है, जो जून में 50.9 लाख बैरल प्रतिदिन था। रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है, हालाँकि उसके शिपमेंट में भी कमी आ सकती है। अनुमान है कि रूस से 22.6 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आएगा, जबकि पिछले महीने यह 27.3 लाख बैरल प्रतिदिन था। इसके बावजूद, रूस की सप्लाई उसके 12 महीने के औसत 17.3 लाख बैरल प्रतिदिन से काफी ऊपर बनी हुई है।
रिफाइनर की पसंद और बदलते सप्लायर
भारतीय रिफाइनर (Refiners) अपने प्रोक्योरमेंट (Procurement) की रणनीति बदल रहे हैं। वे ऐसे कच्चे तेल को तरजीह दे रहे हैं जिनसे डीजल और जेट फ्यूल जैसे मिडल डिस्टिलेट्स (Middle Distillates) का उत्पादन ज्यादा हो। इस प्रोडक्ट इकोनॉमिक्स (Product Economics) पर ध्यान देने की वजह से सप्लायर रैंकिंग में बदलाव आया है। जुलाई में वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात बढ़कर 3.15 लाख बैरल प्रतिदिन होने की उम्मीद है, जिससे वेनेजुएला भारत का चौथा सबसे बड़ा सप्लायर बन जाएगा। वहीं, अमेरिका से आयात घटकर 1.25 लाख बैरल प्रतिदिन रह सकता है, जो जून में 1.57 लाख बैरल प्रतिदिन था। अमेरिकी शिपमेंट में फरवरी के अंत से गिरावट देखी जा रही है, क्योंकि भारतीय रिफाइनरों के लिए अमेरिका से आने वाले लाइट क्रूड (Light Crude) की क्वालिटी अभी उपलब्ध अन्य विकल्पों की तुलना में कम आकर्षक हो गई है।
आने वाले हफ्तों में ऊर्जा क्षेत्र के लिए सबसे अहम बात यह होगी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई की दिक्कतें कब तक बनी रहती हैं और क्या सऊदी अरब की आयात में हुई बढ़त जारी रह पाती है। इसके अलावा, भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों के निवेशक यह भी देखेंगे कि कच्चे तेल की खरीद लागत में हो रहे बदलावों का आने वाले तिमाही नतीजों में उनके प्रॉफिट मार्जिन पर क्या असर पड़ता है।
