State Trading Corporation of India Limited (STC) के बोर्ड की 11 फरवरी 2026 को हुई अहम बैठक में Q2/H1 FY26 (30 सितंबर 2025 तक) और Q3/9M FY26 (31 दिसंबर 2025 तक) के अनऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स को मंजूरी मिली। इसी के साथ, Smt. Ritu Bhatia को 10 मार्च 2026 से कंपनी सेक्रेटरी, KMP और कंप्लायंस ऑफिसर के तौर पर नियुक्त किया गया।
लेकिन, ऑडिटर P V A R & Associates की रिपोर्ट ने STC के नतीजों पर गहरा ग्रहण लगा दिया है। स्टैंडअलोन फाइनेंशियल के लिए ऑडिटर ने 'क्वालिफाइड ओपिनियन' दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नॉन-करंट एसेट्स को ओवरस्टेट किया गया है। ऐसा लीज पीरियड एक्सपायर होने के बावजूद और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) व लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) द्वारा अधिग्रहित जमीन का एडजस्टमेंट न करने के कारण हुआ है।
एक तरफा सेटलमेंट से ₹606 करोड़ का प्रॉफिट
Q2 FY26 के लिए, STC ने लेंडर बैंक्स के साथ वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) के जरिए ₹606.23 करोड़ का एक बड़ा एकमुश्त प्रॉफिट दर्ज किया। हालांकि, ऑडिटर की रिपोर्ट का मुख्य फोकस नतीजों की क्वॉलिटी पर रहा है, न कि उनकी कुल राशि पर।
रिसीवेबल्स पर बड़ा सवाल
ऑडिटर के अनुसार, STC के फाइनेंशियल की क्वॉलिटी काफी कमजोर है। ₹1,07,125.27 लाख के ट्रेड रिसीवेबल्स, जो 3 साल से अधिक समय से बकाया हैं (कुल ₹1,69,852.89 लाख का हिस्सा), की रिकवरी पर गंभीर संदेह है। ऑडिटर का मानना है कि इसके लिए पर्याप्त प्रोविजनिंग नहीं की गई है, जिसका मतलब है कि प्रॉफिट को ओवरस्टेट किया गया है।
इसके अलावा, ₹3,169.64 लाख के रिकवरेबल क्लेम्स और L&DO से ₹4,743 लाख की डिमांड के लिए प्रोविजन न करना, प्रॉफिट को ओवरस्टेट और लायबिलिटीज को अंडरस्टेट दर्शाता है। कुछ प्रॉपर्टीज, जिन्हें नॉन-करंट एसेट्स हेल्ड फॉर सेल के तौर पर वर्गीकृत किया गया है, उनके टाइटल डीड्स का उपलब्ध न होना और अनप्रोवाइडेड GST इनपुट भी चिंताजनक हैं।
ऑडिटर द्वारा उठाई गई मुख्य आपत्तियां:
- ओवरस्टेटेड एसेट्स और प्रॉफिट: एक्सपायर्ड लीज और DMRC, L&DO की जमीन के एडजस्टमेंट के कारण।
- डाउटफुल रिसीवेबल्स: ₹1,07,125.27 लाख के रिसीवेबल्स पर रिकवरी का संदेह, जिससे प्रॉफिट ओवरस्टेट हुआ।
- नॉन-प्रोविजनिंग: क्लेम्स (₹3,169.64 लाख) और L&DO डिमांड (₹4,743 लाख) के लिए प्रोविजन न करना, जिससे प्रॉफिट बढ़ा और लायबिलिटीज घटीं।
- प्रॉपर्टी टाइटल: एसेट्स हेल्ड फॉर सेल के टाइटल डीड्स का उपलब्ध न होना।
- पेनाल्टी: स्टॉक एक्सचेंज पेनाल्टी के लिए प्रोविजन न करना (Q2/H1 FY26 के लिए लगभग ₹56.02 लाख)।
- इन्वेस्टमेंट: ज्वॉइंट वेंचर इन्वेस्टमेंट्स की रिकवरी पर अनिश्चितता।
कंसोलिडेटेड फिगर्स पर डिस्क्लेमर
कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स के लिए, ऑडिटर ने Q2/H1 FY26 पर 'डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन' जारी किया। इसका कारण सब्सिडियरी STCL लिमिटेड के अन-रिव्यू फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स थे, जिन्होंने कंसोलिडेटेड फिगर्स पर राय देना असंभव बना दिया। दिसंबर 2025 को समाप्त नौ महीनों के लिए भी ऐसी ही गंभीर आपत्तियां दर्ज की गईं।
'नॉन-गोइंग कंसर्न' स्टेटस
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कंपनी FY 2021-22 से ही अपने अकाउंट्स को 'नॉन-गोइंग कंसर्न बेसिस' पर तैयार कर रही है। इसका सीधा मतलब है कि कंपनी के भविष्य में संचालन जारी रखने की क्षमता पर गंभीर संदेह है। ऑडिटर की 'क्वालिफाइड' और 'डिस्क्लेमर' ओपिनियन इस जोखिम को और बढ़ाते हैं, और STC की वित्तीय स्थिति और प्रदर्शन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं। निवेशकों को भविष्य में संभावित राइट-ऑफ, SEBI (LODR) रेगुलेशन्स का पालन न करने पर लगने वाले जुर्माने और कंपनी की समग्र व्यवहार्यता को लेकर अनिश्चितता पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।