SGB 2020-21 Series VI: रिडेम्पशन प्राइस ₹15,384 तय, निकासी से पहले टैक्स के नए नियम जरूर जानें

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AuthorMehul Desai|Published at:
SGB 2020-21 Series VI: रिडेम्पशन प्राइस ₹15,384 तय, निकासी से पहले टैक्स के नए नियम जरूर जानें

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने SGB 2020-21 Series VI के लिए प्री-मैच्योर रिडेम्पशन प्राइस **₹15,384** प्रति ग्राम तय किया है, जो **8 सितंबर, 2026** से प्रभावी होगा। हालांकि निवेशकों को करीब **204%** का रिटर्न मिल रहा है, लेकिन बाहर निकलने से पहले नए टैक्स नियमों का ध्यान रखना जरूरी है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने SGB 2020-21 Series VI के लिए प्री-मैच्योर रिडेम्पशन प्राइस ₹15,384 प्रति ग्राम घोषित कर दिया है। यह कीमत 8 सितंबर, 2026 से लागू होगी। यह भाव इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन द्वारा रिडेम्पशन तारीख से पिछले तीन दिनों के 999 शुद्धता वाले सोने के औसत क्लोजिंग भाव के आधार पर तय किया गया है।

शानदार रिटर्न की हकीकत

शुरुआती निवेशकों के लिए यह रिडेम्पशन प्राइस करीब 204% का एब्सोल्यूट रिटर्न दर्शाता है। जब यह सीरीज जारी हुई थी, तब ऑनलाइन आवेदकों के लिए इश्यू प्राइस ₹5,067 प्रति ग्राम था। पिछले छह वर्षों में सोने की कीमतों में आई यह भारी तेजी निवेशकों के लिए मुनाफे का बड़ा जरिया बनी है, साथ ही उन्हें हर छह महीने पर मिलने वाला ब्याज भी एक अतिरिक्त फायदा रहा है।

टैक्स के नए नियमों का असर (Updated Tax Considerations)

निवेशकों को 1 अप्रैल, 2026 से लागू हुए नए टैक्स नियमों को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। मौजूदा नियमों के अनुसार, SGB पर कैपिटल गेन्स टैक्स में छूट अब केवल उन्हीं ओरिजिनल सब्सक्राइबर्स को मिलेगी जो बॉन्ड को मैच्योरिटी तक होल्ड करेंगे। अब किसी भी तरह का प्री-मैच्योर रिडेम्पशन एक टैक्सेबल इवेंट माना जाएगा, चाहे आप ओरिजिनल निवेशक ही क्यों न हों।

इसके अलावा, सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए बॉन्ड्स पर भी टैक्स छूट का लाभ नहीं मिलेगा, भले ही आप उसे मैच्योरिटी तक होल्ड करें। यह बदलाव निवेशकों की गणित को पूरी तरह बदल देता है। हो सकता है कि सोने की कीमतों में बढ़त के आधार पर बाहर निकलना आकर्षक लगे, लेकिन टैक्स का बोझ जोड़ने के बाद यह सौदा घाटे का हो सकता है।

क्या है सही रणनीति?

प्री-मैच्योर रिडेम्पशन का फैसला लेने से पहले, अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से संभावित टैक्स का कैलकुलेशन जरूर करें। आपको यह तय करना होगा कि क्या आपकी तरलता (Liquidity) की जरूरतें टैक्स के नुकसान से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं या फिर मैच्योरिटी तक इंतजार करना अधिक फायदेमंद साबित होगा। निवेशकों को रिडेम्पशन विंडो और मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की टैक्स फाइलिंग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही कोई भी कदम उठाना चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.