RBI ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2019-20 सीरीज VIII के प्रीमैच्योर रिडेम्पशन (समय से पहले निकासी) का भाव ₹14,170 प्रति यूनिट तय किया है, जो 21 जुलाई 2026 से लागू होगा। इससे निवेशकों को बड़ा कैपिटल गेन (Capital Gain) मिलेगा, हालांकि अब इन पर टैक्स (Tax) के नए नियम लागू होंगे।
Detailed Coverage
जानिए कितना मिलेगा रिडेम्पशन वैल्यू?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2019-20 सीरीज-VIII के लिए समय से पहले निकासी (Premature Redemption) का भाव ₹14,170 प्रति यूनिट घोषित किया है। यह वैल्यू 21 जुलाई 2026 से लागू होगी, जो इस खास गोल्ड बॉन्ड सीरीज में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए एग्जिट विंडो (Exit Window) का काम करेगी।
निवेशकों को हुआ बंपर मुनाफा!
रिडेम्पशन प्राइस की गणना, इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा रिपोर्ट किए गए सोने के क्लोजिंग प्राइस के औसत के आधार पर की जाती है। जिन्होंने ऑनलाइन माध्यम से ₹3,966 प्रति ग्राम के इश्यू प्राइस पर सब्सक्रिप्शन लिया था, उनके लिए यह रिडेम्पशन भाव करीब 257% का कैपिटल एप्रिसिएशन (Capital Appreciation) दर्शाता है।
यह मुनाफा बॉन्डहोल्डर्स को मिले 2.5% सालाना ब्याज के अतिरिक्त है। सरल शब्दों में, ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन में ₹1 लाख का शुरुआती निवेश अब ₹3.57 लाख के करीब पहुंच गया है। जो निवेशक ऑफलाइन माध्यम से ₹4,016 प्रति ग्राम पर निवेश किए थे, उन्हें भी अच्छा रिटर्न मिलेगा, हालांकि ऑनलाइन डिस्काउंट के अभाव में उनका कुल प्रतिशत लाभ थोड़ा कम होगा।
टैक्स के नए नियम का असर
हालांकि यह कैपिटल एप्रिसिएशन काफी बड़ा है, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि 1 अप्रैल से लागू हुए नए टैक्स नियमों के तहत, समय से पहले निकासी पर कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gains Tax) लगेगा। पहले, अगर बॉन्ड को 8 साल की मैच्योरिटी तक होल्ड किया जाता था, तो ओरिजिनल सब्सक्राइबर्स को कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिलती थी। वहीं, जो निवेशक इन बॉन्ड्स को सेकेंडरी मार्केट से खरीदते हैं, उन पर होल्डिंग पीरियड या मैच्योरिटी डेट की परवाह किए बिना कैपिटल गेन टैक्स लगता है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
समय से पहले निकासी का विकल्प चुनें या मैच्योरिटी तक होल्ड करें, यह निवेशक के फाइनेंशियल गोल्स और टैक्स प्लानिंग पर निर्भर करेगा। जो निवेशक अभी निकासी का फैसला करते हैं, उनके लिंक बैंक अकाउंट में पैसा क्रेडिट हो जाएगा, जिससे वे मौजूदा एप्रिसिएशन को लॉक कर सकेंगे। अन्य SGB सीरीज को होल्ड करने वाले निवेशकों को टैक्स के बदलते परिदृश्य और RBI द्वारा जारी की जाने वाली समय-समय पर मूल्य अपडेट्स पर नजर रखनी होगी, जो इन सरकारी बॉन्ड्स के एग्जिट वैल्यू को तय करते हैं।
