SEBI का बड़ा ऐलान: अब फंड्स में होगा सोना-चांदी का निवेश, ETF की कीमत तय करने का बदला नियम

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
SEBI का बड़ा ऐलान: अब फंड्स में होगा सोना-चांदी का निवेश, ETF की कीमत तय करने का बदला नियम
Overview

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। SEBI ने अब लाइफ साइकिल फंड्स (Lifecycle Funds) में **10%** तक सोना और चांदी को शामिल करने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही, **1 अप्रैल 2026** से गोल्ड और सिल्वर ETFs का वैल्यूएशन ग्लोबल LBMA की जगह घरेलू स्पॉट प्राइस (domestic spot prices) के आधार पर किया जाएगा। इस रेगुलेटरी बदलाव से पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन (portfolio diversification) को बढ़ावा मिलेगा।

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SEBI का दोहरा कदम: फंड्स में सोना-चांदी और ETF के वैल्यूएशन में बदलाव

भारतीय रेगुलेटर SEBI ने निवेश की दुनिया में दो बड़े बदलावों का ऐलान किया है। पहला, अब म्यूचुअल फंड की लाइफ साइकिल फंड्स (जिन्हें टारगेट डेट फंड्स भी कहते हैं) में सोना और चांदी को 0% से 10% तक निवेश करने की इजाजत मिल गई है। यह उन निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत है जो अपने निवेश पोर्टफोलियो में इन कीमती धातुओं को शामिल करना चाहते हैं।

दूसरा और अहम बदलाव गोल्ड और सिल्वर ETFs के वैल्यूएशन (valuation) को लेकर है। 1 अप्रैल 2026 से, इन ETFs का मूल्य निर्धारण लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) की कीमतों पर आधारित नहीं होगा। इसके बजाय, अब भारत के मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा प्रकाशित पोल किए गए स्पॉट प्राइस (polled spot prices) का इस्तेमाल किया जाएगा। SEBI का मकसद इस कदम से घरेलू बाजार की स्थितियों को बेहतर ढंग से दर्शाना, पारदर्शिता बढ़ाना और करेंसी कन्वर्जन (currency conversion), इंपोर्ट ड्यूटी (import duties) और नोटशनल प्रीमियम (notional premiums) जैसी जटिलताओं को दूर करना है। SEBI ने कमोडिटी ETFs के लिए प्राइस बैंड (price bands) और कूलिंग-ऑफ पीरियड (cooling-off periods) में भी बदलाव का प्रस्ताव दिया है, ताकि मार्केट प्राइसिंग (market pricing) को और अधिक गतिशील बनाया जा सके।

सोने-चांदी का बढ़ता महत्व

यह कदम ऐसे समय में आया है जब सोने ने पिछले कुछ सालों में भारतीय इक्विटी (Nifty 50), रियल एस्टेट और डेट (debt) को पीछे छोड़ते हुए शानदार प्रदर्शन किया है। पिछले 20 सालों में सोने ने जहां 15.6% की CAGR (चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर) से रिटर्न दिया है, वहीं Nifty 50 का रिटर्न 12.6% रहा है। हाल ही में, 2025 में गोल्ड ETFs ने 72% तक का रिटर्न दिया, जबकि चांदी में इससे भी बड़ी तेजी देखी गई। साल 2026 के लिए भी अनुमान तेजी के हैं, जहां एक्सपर्ट्स सोने की कीमत $4,000 से $6,200 प्रति औंस तक पहुंचने की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि जेपी मॉर्गन (J.P. Morgan) ने इसे साल के अंत तक $5,000/oz तक पहुंचने का अनुमान लगाया है।

इस तेजी के पीछे कई वजहें हैं, जिनमें जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता (geopolitical uncertainties) और करेंसी की विश्वसनीयता पर चिंता के चलते सेंट्रल बैंक (central bank) की तरफ से सोने की बड़ी खरीद, और इन्वेस्टर्स की बढ़ती मांग शामिल है। साथ ही, बढ़ती स्टॉक/बॉन्ड कोरिलेशन (stock/bond correlations) सोने को एक बेहतरीन डाइवर्सिफायर (diversifier) और करेंसी डेबेसमेंट (currency debasement) के खिलाफ एक बचाव (hedge) के तौर पर स्थापित कर रही है। भारतीय रुपये का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले प्रदर्शन भी घरेलू सोने की कीमतों को प्रभावित करता है। भारत में गोल्ड ETFs का कुल AUM (Assets Under Management) अक्टूबर 2025 तक ₹1 लाख करोड़ को पार कर गया था, जो निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।

सतर्क रहने की जरूरत

हालांकि, कीमती धातुओं, खासकर चांदी की अंतर्निहित अस्थिरता (volatility) को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चांदी में इंट्रा-डे (intraday) बड़ी चाल देखी गई है। सोना वैश्विक अनिश्चितताओं और महंगाई के खिलाफ एक बचाव (hedge) तो है, लेकिन यह लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन (wealth creation) के लिए इक्विटी का विकल्प नहीं है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने का निवेश पोर्टफोलियो का 5-15% तक सीमित रखना बेहतर होता है ताकि डाइवर्सिफिकेशन का फायदा मिले और इक्विटी की ग्रोथ क्षमता कमजोर न हो।

आगे क्या?

SEBI का यह कदम भारतीय निवेश इकोसिस्टम को और मजबूत और विविध बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। मजबूत ग्लोबल डिमांड, सेंट्रल बैंक की खरीद और भू-राजनीतिक चिंताओं के चलते, कीमती धातुएं एक महत्वपूर्ण एसेट क्लास बनी रहेंगी। साल 2026 में सोने की कीमतों में बढ़ोतरी का अनुमान बना हुआ है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.