नियामक निकायों की गंभीर चिंताएं
चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने विस्तार से बताते हुए कहा कि RBI और IRDAI, दोनों ने ही बैंक्स और इंश्योरेंस कंपनियों को कमोडिटी डेरिवेटिव्स के बाजार में उतरने देने को लेकर अपनी गंभीर आपत्तियां जताई हैं। इन नियामकों का कहना है कि इन खास तरह के फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में काफी ज्यादा वोलेटिलिटी (Volatility) और विशेष जोखिम (Risks) शामिल हैं, जो इन संस्थानों के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
इंश्योरेंस कंपनियों के लिए मिसमैच
खास तौर पर, कमोडिटी डेरिवेटिव्स को बीमा कंपनियों के लॉन्ग-टर्म (Long-term) निवेश लक्ष्यों के लिए एक बड़ा मिसमैच (Mismatch) माना गया है। उनकी लंबी अवधि की देनदारियों को देखते हुए, इस तरह के अस्थिर बाजार में निवेश करना उनके लिए एक बड़ा जोखिम साबित हो सकता है।
SEBI का फैसला और आगे की राह
SEBI ने RBI और IRDAI द्वारा उठाए गए तर्कों को स्वीकार करते हुए, फिलहाल इस मामले में आगे का काम रोक दिया है। पांडे ने कहा, "उनकी अपनी वजहें हैं… हम इसे यहीं छोड़ देंगे।" यह फैसला तब आया है जब SEBI पहले से ही कमोडिटी मार्केट को बढ़ावा देने के लिए पेंशन फंड्स (Pension Funds) जैसे अधिक प्रतिभागियों को अनुमति देने के तरीकों पर विचार कर रहा था।
AI जोखिमों पर गाइडेंस
इसके अतिरिक्त, चेयरमैन पांडे ने यह भी संकेत दिया कि SEBI जल्द ही मार्केट इंटरमीडियरीज (Market Intermediaries) के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) से जुड़े संभावित जोखिमों पर एक गाइडेंस जारी करने की योजना बना रहा है। इसका उद्देश्य वित्तीय बाजार के खिलाड़ियों को AI के बढ़ते उपयोग के साथ उत्पन्न होने वाली सिस्टम की कमजोरियों के लिए तैयार करना है।
