Solvent Extractors’ Association of India (SEA) ने एडिबल ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की चेतावनी जारी की है। भारत अपनी जरूरत का **55%** से ज्यादा तेल आयात करता है, ऐसे में ग्लोबल सप्लाई में कमी FMCG कंपनियों के मुनाफे पर असर डाल सकती है।
ग्लोबल रिस्क से सप्लाई पर खतरा
इंडस्ट्री बॉडी ने साफ किया है कि अल-नीनो जैसे मौसम संबंधी खतरों और वैश्विक संघर्षों के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इंडोनेशिया का B50 बायोडीजल प्रोग्राम पाम ऑयल की वैश्विक उपलब्धता को कम कर सकता है, जिससे कीमतों में तेजी बनी रह सकती है। भारत, जो अपनी जरूरतों के लिए पूरी तरह विदेशों पर निर्भर है, वहां इसका सीधा असर महंगाई के रूप में दिख सकता है।
कंपनियों के मार्जिन पर दबाव
Adani Wilmar और Patanjali Foods जैसी बड़ी कंपनियों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। जब कच्चे माल (Raw material) की कीमतें बढ़ती हैं, तो कंपनियों को लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना पड़ता है। अगर डिमांड कम रही, तो इसका सीधा असर कंपनियों के नेट प्रॉफिट पर पड़ेगा।
पॉलिसी और व्यापार की बाधाएं
SEA ने घरेलू स्तर पर भी कई मुद्दों को उठाया है:
- Rice Bran Oil: रेगुलेटरी दिक्कतों के कारण डोमेस्टिक यूनिट्स की क्षमता प्रभावित हो रही है। संस्था ने 5% GST के सुझाव दिए हैं।
- Trade Hurdles: चीन को रेपसीड निर्यात करने में रजिस्ट्रेशन की समस्या आ रही है।
- Nepal Imports: SAFTA के तहत नेपाल से जीरो-ड्यूटी इंपोर्ट के कारण यूपी और बिहार जैसे क्षेत्रों में बाजार की कीमतें प्रभावित हो रही हैं, जिसे लेकर सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की गई है।
निवेशकों को अब सरकार के नए ड्यूटी स्ट्रक्चर और इन कंपनियों द्वारा बढ़ती लागत को मैनेज करने की क्षमता पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
