रूस से भारत को क्रूड की 50% सप्लाई जारी, अगस्त 2026 तक रहेगा ये ट्रेंड

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
रूस से भारत को क्रूड की 50% सप्लाई जारी, अगस्त 2026 तक रहेगा ये ट्रेंड

भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूस अब तेल का सबसे बड़ा स्रोत बन गया है। अनुमान है कि अगस्त 2026 तक भारत की आधी ज़रूरतें रूस से ही पूरी होंगी। यह सप्लाई भारत को मध्य पूर्व के पारंपरिक रास्तों से संभावित सप्लाई में रुकावट से बचाने में मदद कर रही है।

भारत के लिए रूस कच्चे तेल (Crude Oil) का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है। इम्पोर्ट डेटा के अनुसार, यह सिलसिला अगस्त 2026 तक जारी रहेगा और देश की लगभग 50% ज़रूरतें रूस से पूरी होंगी। जून में रूस से करीब 2.6 मिलियन बैरल प्रति दिन की सप्लाई भारत को मिली है। यह रूस पर निर्भरता भारतीय रिफाइनरियों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की एक बड़ी रणनीति बन गई है, खासकर मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास की चिंताओं को देखते हुए।

रिफाइनरियों के लिए बड़ा फायदा

भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और प्राइवेट रिफाइनरों के लिए, रूस से तेल की यह स्थिर सप्लाई एक अहम सुरक्षा कवच का काम कर रही है। इन वॉल्यूम्स को लॉक करके, घरेलू कंपनियों ने एशिया के अन्य रिफाइनिंग हब्स की तुलना में अपनी ऑपरेशनल क्षमता को बनाए रखने में कामयाबी हासिल की है, जो सप्लाई में बाधाओं का सामना कर रहे थे। इस बदलाव ने पश्चिमी एशियाई देशों से पहले आयात किए जाने वाले मीडियम सॉर क्रूड (Medium Sour Crude) के एक हिस्से को बदल दिया है, जिससे रिफाइनरियों के लिए फीडस्टॉक (Feedstock) को स्थिर करने में मदद मिली है।

प्रतिस्पर्धा और कीमतों का खेल

पश्चिमी एशियाई देशों के उत्पादक लॉजिस्टिक्स (Logistics) में विविधता लाकर बाज़ार हिस्सेदारी वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं। Saudi Aramco ने अगस्त के लिए अपनी ऑफिशियल सेलिंग प्राइस (Official Selling Price) में भारी कटौती की है, जिसमें Arab Light की कीमतें $11 प्रति बैरल तक कम कर दी गई हैं। यह पिछले बीस सालों में सबसे बड़ी कटौती बताई जा रही है। उत्पादक एक्सपोर्ट के लिए वैकल्पिक रास्तों का भी उपयोग कर रहे हैं, जैसे सऊदी अरब के यांबू पोर्ट (Yanbu port) से ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के ज़रिए, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य से बचा जा सके। हालांकि, इन वैकल्पिक रास्तों में लॉजिस्टिकल लागत और शिपिंग का समय बढ़ जाता है, जो फिलहाल भारतीय खरीदारों के लिए रूसी क्रूड को कीमत के लिहाज़ से प्रतिस्पर्धी बनाए हुए है।

ऑपरेशनल और भू-राजनीतिक जोखिम

हालांकि मौजूदा व्यवस्था रिफाइनरी मार्जिन (Refinery Margins) को सहारा दे रही है, लेकिन कई ऐसे फैक्टर हैं जो भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में 'Sanctioning Russia Act' जैसे प्रस्तावित कानून, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रवाह के संबंध में अनिश्चितता पैदा करते हैं। अगर ये लागू होते हैं, तो ये भुगतान प्रणाली या शिपिंग लॉजिस्टिक्स को जटिल बना सकते हैं। इसके अलावा, भारत में आमतौर पर मानसून के मौसम में, जो सितंबर तक चलता है, घरेलू मांग कम हो जाती है। रिफाइनर अक्सर इस कम मांग वाले समय का उपयोग त्योहारी सीजन से पहले इन्वेंट्री (Inventory) के स्तर को अनुकूलित करने के लिए करते हैं। इसलिए, आने वाले हफ्तों में उनकी खरीद रणनीति वर्तमान इन्वेंट्री लागत और साल की दूसरी छमाही में अपेक्षित मांग वृद्धि के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित रहेगी।

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