Sunflower Oil Crisis: रूस ने बदला रास्ता, भारत की थाली पर बढ़ेगा महंगाई का असर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Sunflower Oil Crisis: रूस ने बदला रास्ता, भारत की थाली पर बढ़ेगा महंगाई का असर

ब्लैक सी (Black Sea) में लॉजिस्टिक दिक्कतों के चलते रूस अब अपना सनफ्लावर ऑयल चीन भेज रहा है। इस बड़े बदलाव से भारत के लिए सप्लाई कम हो सकती है, जिससे घरेलू इम्पोर्टर्स को नए विकल्पों की तलाश करनी होगी।

ब्लैक सी पोर्ट्स पर जारी लॉजिस्टिक संकट ने रूस को अपनी एक्सपोर्ट रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। समुद्री रास्तों में आ रही दिक्कतों के कारण रूसी एक्सपोर्टर्स अब जमीन के रास्ते चीन को तेल भेजने पर जोर दे रहे हैं। अनुमान है कि इस मार्केटिंग ईयर में चीन को होने वाला निर्यात 10 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है, जो पिछली बार के मुकाबले दोगुना है।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत, जो अब तक रूसी सनफ्लावर ऑयल का बड़ा खरीदार रहा है, अब एक बड़ा सप्लाई गैप देख रहा है। रूस से भारत आने वाले शिपमेंट के 15 लाख टन से घटकर 11 लाख टन रहने का अनुमान है। रूस में सनफ्लावर सीड का प्रोडक्शन भले ही रिकॉर्ड 2 करोड़ टन (पिछले साल 1.75 करोड़ टन) रहा हो, लेकिन प्रॉसेस्ड ऑयल बाहर न निकाल पाने के कारण वहां 30 लाख टन का स्टॉक फंसा हुआ है।

भारतीय कंपनियों के लिए चुनौती

रशियन ऑयल की कमी से जूझ रहे भारतीय रिफाइनर्स अब मजबूरन पाम ऑयल और सोया ऑयल जैसे विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। मार्केट जानकारों का मानना है कि इस उठापटक से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। जब कच्चे माल (Raw material) की सप्लाई में बाधा आती है, तो प्रोक्योरमेंट कॉस्ट बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ता है।

आने वाले महीनों में निवेशकों को यह देखना होगा कि ऑयल रिफाइनिंग कंपनियों का 'कॉस्ट ऑफ गुड्स सोल्ड' कैसे बदलता है और क्या घरेलू बाजार में खाने के तेल की कीमतों में और अस्थिरता आती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.