भारतीय रुपया सोमवार सुबह डॉलर के मुकाबले **39 paise** लुढ़ककर **95.77** के स्तर पर आ गया। इसकी मुख्य वजह कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें हैं, जो **$79** प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। इसके साथ ही, घरेलू शेयर बाज़ार में भी बिकवाली का माहौल देखा जा रहा है।
ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल का खेल
सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाज़ार की शुरुआत थोड़ी निराशाजनक रही। डॉलर के मुकाबले रुपया 39 paise की बड़ी गिरावट के साथ 95.77 पर खुला। इस गिरावट की जड़ें अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में देखी जा रही हैं, जहाँ ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतें 4% से ज़्यादा उछलकर $79 प्रति बैरल के ऊपर निकल गई हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव, ने तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास की गतिविधियों ने इस चिंता को और गहरा दिया है।
शेयर बाज़ार पर भी छाया दबाव
रुपये पर पड़ रहे इस दबाव का असर सीधे भारतीय शेयर बाज़ार पर भी देखने को मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स (Sensex) 616.15 अंक टूटकर 76,946.97 पर कारोबार कर रहा था, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी (Nifty) भी 190.50 अंक गिरकर 24,015 पर आ गया। जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों के मुनाफे पर असर डाल सकती हैं, खासकर उन सेक्टरों के लिए जो तेल पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में मजबूती
हालांकि, रुपये पर तात्कालिक दबाव के बावजूद, भारत की विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) की स्थिति थोड़ी राहत दे रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 3 जुलाई को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार $7.26 अरब बढ़ गया। यह बढ़ोतरी पिछले सप्ताह $5.654 अरब की गिरावट के बाद आई है। कुल भंडार अब $674.193 अरब हो गया है, जो किसी भी बड़े उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए एक मजबूत बफर का काम करता है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
फिलहाल, निवेशकों की निगाहें कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी रहेंगी। अगर कीमतें $79 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो रुपये और महंगाई पर दबाव जारी रह सकता है। इसके अलावा, बाज़ार की नज़र केंद्रीय बैंक के अगले कदमों पर भी होगी कि वे कैसे रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करते हैं। साथ ही, भू-राजनीतिक स्थिति में होने वाले किसी भी बदलाव पर भी बारीकी से नज़र रखी जाएगी।
