Rubber Board के इलेक्ट्रॉनिक मार्केटप्लेस 'mRube' ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जून 2022 में लॉन्च हुए इस प्लेटफॉर्म पर अब तक कुल **₹1,000 करोड़** से ज्यादा का रबर कारोबार हो चुका है।
कारोबार का नया डिजिटल चेहरा
Rubber Board के डिजिटल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म mRube ने एक बड़ा ऑपरेशनल माइलस्टोन हासिल किया है। इस इलेक्ट्रॉनिक मार्केटप्लेस ने अब तक 59,500 टन से अधिक रबर का लेनदेन प्रोसेस किया है, जिसमें RSS, ISNR और latex जैसे प्रमुख ग्रेड शामिल हैं। यह प्लेटफॉर्म भारतीय मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोटिव सेक्टर के लिए कच्चे माल की खरीद को सरल बना रहा है।
कैसे बदली ट्रेडिंग की तस्वीर?
पारंपरिक रूप से रबर का कारोबार मौखिक समझौतों और स्थानीय नेटवर्क पर निर्भर था, जिससे अक्सर कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता था। mRube ने इसे बदलकर अब हर लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड रखना शुरू कर दिया है। इससे खरीदारों और विक्रेताओं दोनों के लिए प्राइस डिस्कवरी (Price Discovery) आसान हो गई है और बिचौलियों का प्रभाव कम हुआ है।
सुदूर इलाकों की नेशनल मार्केट से कनेक्टिविटी
इस डिजिटल पहल का सबसे बड़ा फायदा पूर्वोत्तर (Northeast) के किसानों, विशेषकर त्रिपुरा के उत्पादकों को मिला है। पहले इन इलाकों के किसानों को बड़े औद्योगिक खरीदारों तक पहुंच बनाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब बड़े खरीदार सीधे इन क्षेत्रों से रबर खरीद पा रहे हैं, जिससे लॉजिस्टिक बाधाएं कम हुई हैं।
भविष्य की चुनौतियां और अवसर
हालांकि mRube कोई पब्लिक लिमिटेड कंपनी नहीं है, लेकिन इसका सफर भारतीय कमोडिटी मार्केट के डिजिटलीकरण की एक बड़ी मिसाल है। टायर और रबर-प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों के लिए यह एक स्थिर प्रोक्योरमेंट प्रोसेस का जरिया बन सकता है। अब देखना यह है कि रबर बोर्ड किस तरह ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीक की पहुंच को और मजबूत करता है और कैसे बाजार में पारदर्शिता के जरिए कार्टेल जैसी प्रथाओं पर लगाम लगाता है।
