Rio Tinto के दूसरे क्वार्टर के प्रोडक्शन में **7%** की गिरावट आई है। इसकी मुख्य वजह अमेरिका के Kennecott स्मेल्टर में आई अनियोजित दिक्कतें हैं। इसके बावजूद, कंपनी ने अपने पूरे साल के प्रोडक्शन गाइडेंस को बनाए रखा है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया में मौसम की वजह से आई दिक्कतों के बाद आयरन ओर शिपमेंट में **17%** का सुधार देखा गया है।
कॉपर प्रोडक्शन पर असर
Rio Tinto Group ने बताया है कि दूसरे क्वार्टर में कंपनी के कॉपर प्रोडक्शन में 7% की कमी आई है। यह गिरावट अमेरिका के यूटा में स्थित Kennecott स्मेल्टर में अचानक आई रुकावटों के कारण हुई है। इस स्मेल्टर में अभी फर्नेस का काम चल रहा है, जो अगले 6 महीनों तक जारी रहने की उम्मीद है। Kennecott स्मेल्टर अमेरिका में कुल कॉपर सप्लाई का लगभग 15% से 20% हिस्सा सप्लाई करता है।
हालांकि, इस रुकावट के बावजूद, कंपनी ने अपने कॉपर सेगमेंट में प्रोडक्शन कॉस्ट कम की है और साल भर में 800,000 टन से अधिक के प्रोडक्शन का अनुमान लगाया है।
आयरन ओर में रिकवरी और बढ़ती लागत
कॉपर में आई दिक्कतों के बावजूद, Rio Tinto के आयरन ओर बिजनेस में इस क्वार्टर में जोरदार वापसी देखी गई। शिपमेंट 88.8 मिलियन टन तक पहुंच गई, जो पिछले क्वार्टर से 17% और पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 5% ज्यादा है। यह उछाल पहले क्वार्टर में आई दिक्कतों के बाद आया है, जब पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पिलबारा क्षेत्र में प्रोडक्शन पर साइक्लोन का असर पड़ा था।
प्रोडक्शन में रिकवरी के बावजूद, कंपनी ने इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी की चिंता जताई है। डीजल की कीमतें, जो माइनिंग खर्चों का एक अहम हिस्सा हैं, $85 प्रति बैरल से बढ़कर लगभग $140 प्रति बैरल हो गई हैं। इस बढ़ोतरी का सीधा असर पिलबारा आयरन ओर ऑपरेशन्स पर पड़ा है, जिससे पिछले आधे साल में ऑपरेटिंग कॉस्ट में लगभग 80 सेंट प्रति टन की बढ़ोतरी हुई है।
आगे की रणनीति
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटरों और एनर्जी ट्रांजिशन से बढ़ती मांग के कारण कॉपर Rio Tinto के लिए एक महत्वपूर्ण मेटल बना हुआ है। कंपनी ने मध्य पूर्व में चल रहे तनावों पर भी अपडेट दिया है, लेकिन कहा है कि इससे उसके प्रोडक्शन या सप्लाई चेन पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।
निवेशकों के लिए, Kennecott फर्नेस के पुनर्निर्माण की प्रगति पर नजर रखना अहम होगा। साथ ही, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि क्या बढ़ती डीजल की कीमतें और महंगाई का असर आने वाली तिमाहियों में कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा।
