Valuation के बड़े मतभेद के चलते, दिग्गज माइनिंग कंपनियां Rio Tinto और Glencore के बीच 200 अरब डॉलर की संभावित मर्जर (Merger) की बातचीत आखिरकार टूट गई है। दोनों कंपनियों के बीच इस बड़े सौदे को आगे बढ़ाने पर सहमति नहीं बन पाई।
वैल्यूएशन का बड़ा अंतर
सूत्रों के मुताबिक, Glencore अपने पोर्टफोलियो, खासकर कॉपर एसेट्स और मार्केटिंग डिवीज़न के लिए बड़ा प्रीमियम चाहती थी। वे इस मर्ज हुई कंपनी में करीब 40% हिस्सेदारी की मांग कर रहे थे। दूसरी ओर, Rio Tinto का मानना था कि Glencore का प्रस्ताव उनके कॉपर बिजनेस और ग्रोथ पाइपलाइन को 'पर्याप्त रूप से महत्व' नहीं दे रहा था। वैल्यूएशन का यह बड़ा गैप इतना था कि दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके।
बाजार में दिखी गिरावट
इस डील के टूटने की खबर का असर शेयर बाजार पर भी दिखा। 5 फरवरी 2026 को Glencore के शेयर 7.5% तक गिर गए, वहीं Rio Tinto के शेयर भी 1.0% की गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।
कंसॉलिडेशन की राह में रोड़े
यह Rio Tinto और Glencore की डील का टूटना कोई अकेला मामला नहीं है। यह दिखाता है कि माइनिंग सेक्टर में बड़े कंसॉलिडेशन (Consolidation) की कोशिशें कितनी मुश्किल हैं। हाल ही में BHP का Anglo American के लिए 49 अरब डॉलर का प्रस्ताव भी इसी वजह से वापस ले लिया गया था, जो एनर्जी ट्रांज़िशन और AI जैसी टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी मेटल्स की बढ़ती मांग के बावजूद, स्ट्रक्चरल चिंताओं के कारण अटका। [cite: Source A] एकमात्र बड़ी डील जो अभी चल रही है, वह Anglo American और Teck Resources के बीच 53 अरब डॉलर की ऑल-स्टॉक मर्जर है, जिसका लक्ष्य दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा कॉपर प्रोड्यूसर बनना है। [cite: Source A, 16]
कंपनियों का अलग-अलग सफर
Rio Tinto, जिसका मार्केट कैप लगभग 192.6 अरब डॉलर है और P/E रेश्यो 15.4-17.3 के आसपास है, का फाइनेंसियल प्रोफाइल Glencore की तुलना में ज्यादा स्थिर नजर आता है। वहीं, 2025 के अंत तक करीब 59.6 अरब डॉलर वैल्यूएशन वाली Glencore का फाइनेंसियल परफॉरमेंस ज्यादा वोलेटाइल रहा है, जो हाल के नेगेटिव P/E रेश्यो से भी झलकता है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो Rio Tinto ने निवेशकों को Glencore से कहीं बेहतर रिटर्न दिया है। 1990 में 1,000 डॉलर का निवेश Rio Tinto में आज 58,000 डॉलर से ज्यादा का हो गया होता, जबकि Glencore के 2011 के IPO में इतनी ही राशि 711 डॉलर के आसपास ही रह जाती। यह अंतर शायद Glencore की प्रीमियम की मांग को भी प्रभावित करता है, जो वे अपने 2011 के IPO प्राइस 530 पेंस को बेंचमार्क के तौर पर देखते हैं। [cite: Source A]
भविष्य की उम्मीदें
आगे देखें तो 2026 में कॉपर की कीमतों में मजबूती बने रहने का अनुमान है, जो एनर्जी ट्रांज़िशन और AI की मांग से बढ़ सकती है। हालांकि, माइन सप्लाई इस मांग को पूरा करने में पिछड़ रही है। एनालिस्ट्स की राय भी मिश्रित है। Deutsche Bank ने Rio Tinto को 'Hold' रेटिंग दी थी, जबकि Eliana Scialabba ने इसे 'Upgrade to Buy' किया। वहीं, Glencore पर UBS ने 'Neutral' और Berenberg ने प्रोडक्शन चिंताओं के चलते 'Hold' रेटिंग दी है।